नई दिल्लीः भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम गर्ग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने भारत को अमेरिकी बाजार में चावल निर्यात करने के लिए शुल्क मुक्त “अनुमति” दिए जाने पर सवाल उठाए थे। यह विवाद व्हाइट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान उठाया गया, जहां ट्रंप ने अमेरिकी किसानों के लिए बारह अरब डॉलर का समर्थन पैकेज शुरू करने की घोषणा की थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सवाल किया था कि क्यों भारत को अमेरिकी बाजार में चावल निर्यात करने की अनुमति दी जाती है, जबकि अमेरिकी किसान इसके खिलाफ सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। इस सवाल के बाद भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता पहले से ही लंबी देरी का सामना कर रही है।
डॉ. प्रेम गर्ग ने कहा कि ट्रंप की यह टिप्पणी व्यापारिक अनिश्चितता को और बढ़ाती है, जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता पहले से ही अटकी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय चावल निर्यात अमेरिका के बाजार में पूरी तरह से विश्व व्यापार संगठन ;ॅज्व्द्ध के नियमों और दोनों देशों के बीच तय किए गए व्यापारिक दिशा-निर्देशों के तहत होता है। गर्ग ने कहा, हमारा चावल निर्यात वैश्विक व्यापार मानदंडों का पालन करता है। बासमती और अन्य खास किस्म के चावल अमेरिका में विशेष रूप से लोकप्रिय हैं और किसी भी अतिरिक्त शुल्क की धमकी का कोई व्यापारिक औचित्य नहीं है।
गर्ग ने यह भी कहा कि भारतीय चावल का निर्यात अमेरिका में बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर बासमती चावल का, जो अमेरिका में दक्षिण एशियाई समुदाय के बीच अत्यधिक पसंद किया जाता है। डॉ. प्रेम गर्ग ने कहा कि यदि अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं, तो इससे न केवल भारतीय निर्यातकों के व्यापार पर असर पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ेगा। अमेरिकी बाजार में बासमती चावल जैसी किस्मों पर निर्भरता को देखते हुए, अगर टैरिफ लगाए गए, तो इसके दाम बढ़ सकते हैं और इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
गर्ग ने यह भी कहा कि ट्रंप की टिप्पणी मुख्य रूप से घरेलू राजनीतिक दबावों का परिणाम लगती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कृषि क्षेत्र के कड़े विरोध और आयातों पर दबाव का सामना करते हुए, भारत को इस बहस का हिस्सा बना दिया गया है। यह एक आंतरिक राजनीतिक मुद्दा प्रतीत होता है। जब अमेरिकी किसान अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं, तो आयातों को निशाना बनाया जाता है और दुर्भाग्यवश भारत को इसमें घसीटा जाता है।
गर्ग ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की टिप्पणियाँ जारी रहती हैं, तो इससे भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में और अधिक देरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में व्यापार वार्ता पहले से ही धीमी गति से चल रही है और ट्रंप की टिप्पणी इस प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना सकती है। डॉ. प्रेम गर्ग का कहना है कि हम चाहते हैं कि दोनों सरकारें खुले संवाद चैनल बनाए रखें और व्यापारिक नीतियों में अचानक बदलाव से बचें। यह व्यापार प्रवाह को अस्थिर कर सकता है। भारत और अमेरिका के बीच चावल निर्यात को लेकर उपजे इस नए विवाद से व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की टिप्पणी से कृषि आयात पर कड़े रुख को बढ़ावा मिल सकता है, जो पहले से ही जटिल भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक नई चुनौती जोड़ सकता है। दोनों देशों के निर्यातकों और उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है।
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