नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारत ने एक बार फिर अपने उन जांबाजों को सम्मानित किया है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस और शौर्य का परिचय दिया। इस बार भारतीय वायुसेना के कुल 35 बहादुर जवानों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें 9 अधिकारियों को वीर चक्र और 26 को वायु सेना पदक (वीरता) प्रदान किए गए हैं।
सेना के इन वीर अधिकारियों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकवादी समूहों के मुख्यालयों और सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया था। यह ऑपरेशन पाकिस्तान के मुरीदके और बहावलपुर इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों पर करारा प्रहार साबित हुआ। इन अभियानों में भाग लेने वाले जांबाज फाइटर पायलटों ने दुश्मन को उसकी ही धरती पर जवाब दिया।
वीर चक्र, जो युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पदक है, उससे नवाजे गए अधिकारियों में शामिल हैं —ग्रुप कैप्टन रणजीत सिंह सिद्धू, मनीष अरोड़ा, अनिमेष पाटनी, कुणाल कालरा, विंग कमांडर जॉय चंद्रा, स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार, सिद्धांत सिंह, रिजवान मलिक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शवीर सिंह ठाकुर।
वायु सेना पदक (वीरता) पाने वाले 26 अन्य जांबाजों में वे योद्धा भी शामिल हैं जिन्होंने एस-400 और अन्य वायु रक्षा प्रणालियों के माध्यम से दुश्मन के हमलों को विफल किया। इनमें ग्रुप कैप्टन अंकुर हकीम, मानव भाटी, यासिर फारूकी, विंग कमांडर मयंक पालीवाल, आदर्श गुप्ता, स्क्वाड्रन लीडर शुभम शर्मा, राकेश शर्मा, फ्लाइट लेफ्टिनेंट नवीन चंदर सहित अन्य नाम शामिल हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर CBI के 21 अधिकारियों को भी राष्ट्रपति पुलिस पदक और पुलिस पदक प्रदान किए गए हैं, जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान दिया। यह पुरस्कार उन सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा हैं, जो राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि मानते हैं। ऐसे वीर सपूतों के कारण ही भारत आज गर्व से अपने तिरंगे को लहराता देख रहा है।
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