Sculptor Ram Sutar : मशहूर मूर्तिकार राम सुतार का निधन, भारतीय शिल्प कला के एक युग का हुआ अंत

खबर सार :-
Sculptor Ram Sutar : प्रसिद्ध मूर्तिकार और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन। जानिए उनके जीवन, प्रमुख कृतियों और भारतीय कला में योगदान की पूरी कहानी।

Sculptor Ram Sutar : मशहूर मूर्तिकार राम सुतार का निधन, भारतीय शिल्प कला के एक युग का हुआ अंत
खबर विस्तार : -

Sculptor Ram Sutar : भारत की मूर्तिकला (Sculpture) परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने वाले महान शिल्पकार राम वंजी सुतार (Ram Sutar) का बुधवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने नोएडा स्थित अपने आवास पर 100 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण वह कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके पुत्र अनिल सुतार (Anil Sutar) ने परिवार की ओर से उनके निधन की पुष्टि की। राम सुतार (Ram Sutar) का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और इतिहास को आकार देने वाले एक पूरे युग का अंत है। उन्होंने अपने जीवन में ऐसी-ऐसी कृतियां रचीं, जो आने वाली पीढ़ियों को सदियों तक प्रेरित करती रहेंगी।

Sculptor Ram Sutar : साधारण गांव से विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा तक का सफर

19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदूर गांव में जन्मे राम सुतार  (Ram Sutar)  का बचपन बेहद सामान्य परिस्थितियों में बीता। मिट्टी और पत्थर से आकृतियां गढ़ने का शौक बचपन से ही उनके भीतर था। यही रुचि उन्हें मुंबई के प्रतिष्ठित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर तक ले गई, जहां उन्होंने स्वर्ण पदक के साथ शिक्षा पूरी की। गुजरात के केवड़िया में स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity), जो गुजरात के केवड़िया में देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार पटेल (Sardar Patel) ऊंची यह प्रतिमा न केवल भारत, बल्कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। इस परियोजना ने भारतीय शिल्पकला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई।

Sculptor Ram Sutar : संसद से लेकर चंबल तक अमर कृतियां    

राम सुतार  (Ram Sutar) की रचनात्मकता का दायरा बेहद व्यापक रहा। संसद परिसर में स्थापित ध्यानमग्न महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की प्रतिमा हो या घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) की मूर्ति, हर कृति में इतिहास और भावनाओं का जीवंत रूप देखने को मिलता है। उन्हें प्रारंभिक ख्याति मध्य प्रदेश में गांधी सागर बांध पर निर्मित चंबल नदी की प्रतिमा से मिली, जिसे एक ही चट्टान से तराशा गया था। इस मूर्ति को देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी प्रभावित हुए थे और यहीं से राम सुतार को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े प्रोजेक्ट मिलने लगे। एक समय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सलाहकार रहे राम सुतार ने 1959 में सरकारी नौकरी छोड़कर स्वयं को पूरी तरह मूर्तिकला को समर्पित कर दिया। अपने लंबे करियर में उन्होंने देश-विदेश में 50 से अधिक स्मारकों का निर्माण किया, जो आज भी उनकी कला साधना की गवाही देते हैं।

Sculptor Ram Sutar : सम्मान और विरासत

राम सुतार को वर्ष 1999 में पद्म श्री, 2016 में पद्म भूषण और हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के सर्वोच्च सम्मान महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से नवाजा गया था। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, साधना और धैर्य से कला को अमर बनाया जा सकता है। राम सुतार भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पत्थरों में उकेरी गई उनकी सोच, उनके सपने और उनका योगदान भारत की आत्मा में हमेशा जीवित रहेगा।
 

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