DRDO CQB Carbine : भारतीय सेना के सैनिकों को जल्द ही अपनी पुरानी स्टर्लिंग कार्बाइन से छुटकारा मिल जाएगा। उसकी जगह सेना के जवानों के हाथों में एक अत्याधुनिक क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) कार्बाइन जगह बना लेगी। भारतीय सेना ने इस आधुनिक हथियार के निर्माण का जिम्मा रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) और भारत फोर्ज लिमिटेड को दिया है। इसके लिए सेना ने इन दोनों संगठनों को करीब 2000 करोड़ रूपये का ठेका दिया है। सेना की प्रमुख खरीद निविदा में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) के तौर पर क्त्क्व् और भारत फोर्ज लिमिटेड चुना गया है।
DRDO ने बताया कि 5.56x45 मिमी CQB कार्बाइन को DRDO के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE) ने डिजाइन और विकसित किया है, जबकि इसके उत्पादन की जिम्मेदारी भारत फोर्ज लिमिटेड दी गई है। दोनों के प्रस्ताव को भारतीय सेना के अनुरोध प्रस्ताव (RFP) में L1 के रूप में चुना गया है। भारत फोर्ज इस कार्बाइन को अपनी एक सहायक कंपनी कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड की पुणे इकाई में बनाएगी। यह अनुबंध इंसास राइफल के शामिल होने के बाद भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित हथियार प्रणाली के लिए अब तक का सबसे बड़ा है।
DRDO CQB Carbine : स्टर्लिंग कार्बाइन का प्रतिस्थापन
वर्तमान में भारतीय सेना 1940 में डिजाइन की गई सब मशीन गन स्टर्लिंग कार्बाइन का उपयोग में लाती रही है। सेना में इसे लंबे समय से बदलने की मांग होती रही है। इसका कारण यह है कि यह मौजूदा युद्ध परिस्थितियों के हिसाब से एक पुराना हथियार माना जाता रहा है। इसी आवश्यकता को देखते हुए, पुणे में क्त्क्व् के आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE) ने नई कार्बाइन डिजाइन करने का बीड़ा उठाया।
DRDO CQB Carbine : नई कार्बाइन की विशेषताएं
5.56x45 मिमी CQB कार्बाइन कई आधुनिक विशेषताओं से लैस होगी। यह बहुत पास से हमला करने के अनुरूप डिजाइन की जाएगी और वजह में भी यह बहुत हल्की होगी। इसके डिजाइन में ऑप्टिक्स, लेजर डिजाइनर और सहायक उपकरण भी लगाए जाएंगे, जो इसे और भी ज्यादा प्रभावी बनाएंगे। DRDO और भारत फोर्ज का L1 बोलीदाता के रूप में चयन इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने सभी तकनीकी जरूरतों को पूरा करते हुए सबसे कम कीमत पर यह बड़ा अनुबंध हासिल किया है।
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