Covid JN.1 : कोविड-19 की तबाही से दुनिया अभी पूरी तरह उबरी भी नहीं थी कि एशिया में एक बार फिर नए वैरिएंट JN.1 ने दस्तक दे दी है। सिंगापुर, हांगकांग और थाईलैंड जैसे देशों में कोरोना के केसों में तेजी से उछाल देखा जा रहा है। भारत ने भी इसके मद्देनज़र अलर्ट जारी कर दिया है और स्वास्थ्य विभाग हालात पर नजर बनाए हुए है।
ओमिक्रॉन के इस नए उप-संस्करण JN.1 की पहचान सबसे पहले 2023 के अंत में हुई थी। यह BA.2.86 (पिरोला) वेरिएंट से निकला रूप है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन में खास म्यूटेशन के चलते यह बेहद तेजी से फैलता है। यही वजह है कि यह वैरिएंट वैक्सीन से बनी इम्युनिटी को भी चकमा देने की क्षमता रखता है।
सिंगापुर में 3 मई को बीते एक सप्ताह 14,200 नए मामले देखने को मिले जो उससे पिछले सप्ताह के 11,100 मामलों से 30 फीसदी से ज्यादा अधिक हैं। वहीं हांगकांग में इस साल अब तक के सबसे ज्यादा पॉजिटिव केस रिपोर्ट हुए हैं और एक ही हफ्ते में 31 मौतें भी दर्ज की गई हैं। हेल्थ अफसरों के मुताबिक यह आंकड़ा बीते एक साल का सबसे बड़ा है।
भारत में कोरोना के केस अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन थोड़ी वृद्धि ज़रूर देखी गई है। 19 मई तक देश में 257 सक्रिय मामले दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि स्थिति चिंताजनक नहीं है, फिर भी सीमावर्ती देशों में बढ़ते मामलों को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी है।
इस वैरिएंट के लक्षण पहले के ओमिक्रॉन स्ट्रेन से मिलते-जुलते हैं: सूखी खांसी, बहती या बंद नाक, गले में खराश, हल्का बुखार, थकावट, सिरदर्द, कुछ मामलों में डायरिया और स्वाद या गंध जाने की शिकायत
अभी तक के आंकड़ों के अनुसार JN.1 से गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बहुत कम रही है। अधिकतर मामले हल्के लक्षणों वाले हैं। लेकिन बुजुर्ग, पहले से बीमार और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें, हाथों को साबुन या सैनिटाइज़र से साफ रखें, भीड़भाड़ से बचें, लक्षण दिखें तो आइसोलेट हों और डॉक्टर से संपर्क करें । JN.1 वेरिएंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। सावधानी ही इस समय सबसे बेहतर सुरक्षा है। भारत समेत पूरी दुनिया के हेल्थ सिस्टम को फिर से एक बार सतर्कता की जरूरत है, ताकि हम इस वैरिएंट को शुरुआती स्तर पर ही काबू कर सकें।
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