Chaudhary Charan Singh Jayanti : किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तमाम नेताओं ने मंगलवार को श्रद्धांजलि दी। चौधरी चरण सिंह की जयंती पर हर साल 23 दिसंबर (kisan diwas 2025) को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर, PM मोदी ने खेती की तरक्की, किसानों की खुशहाली और समाज के पिछड़े तबके की भलाई में चौधरी चरण सिंह के योगदान को याद किया। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री 'भारत रत्न' चौधरी चरण सिंह को उनकी जयंती पर सादर श्रद्धांजलि। उन्होंने अपना जीवन समाज के पिछड़े तबके की भलाई के साथ-साथ खेती की तरक्की और किसानों की खुशहाली के लिए समर्पित कर दिया। एक कृतज्ञ राष्ट्र राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।"
इस मौके पर जारी एक वीडियो मैसेज में PM मोदी ने कहा, "चौधरी साहब (चौधरी चरण सिंह) ने छोटे किसानों के लिए जो किया, उसे देश कभी नहीं भूल सकता। चौधरी साहब से प्रेरणा लेकर हम लगातार देश के किसानों को मज़बूत बना रहे हैं। हम देश की खेती को नए रास्ते पर ले जाने के लिए किसानों को सपोर्ट और बढ़ावा दे रहे हैं। नेचुरल फार्मिंग और बाजरा पर फोकस करने के पीछे भी यही वजह थी।"
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती, “किसान दिवस” पर राज्य के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि “चौधरी साहब का पूरा जीवन गांवों, गरीबों, शोषितों, वंचितों और किसान भाइयों की खुशहाली के लिए समर्पित था।”
अपने ऑफिशियल "X" अकाउंट पर एक पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने कहा, "किसानों के मसीहा, पूर्व प्रधानमंत्री, 'भारत रत्न' चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।" उन्होंने पोस्ट में कहा, "हमारा पेट भरने वाले किसानों और प्रदेश की जनता को 'किसान दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं।" योगी ने कहा, "चौधरी साहब का पूरा जीवन गांवों, गरीबों, शोषितों, वंचितों और किसान भाइयों की खुशहाली के लिए समर्पित था।"
देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल 23 दिसंबर को नेशनल फार्मर्स डे (National Farmers Day) या किसान दिवस (Kisan Diwas) मनाया जाता है। यह दिन हमारे अन्नदाताओं की कड़ी मेहनत, संघर्ष और लगन को याद करने का मौका देता है। नेशनल फार्मर्स डे की शुरुआत साल 2001 में हुई थी। उस समय की केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती को किसान दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया था।
उस समय NDA सरकार सत्ता में थी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। इसका मुख्य मकसद किसानों के योगदान को नेशनल पहचान दिलाना, उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना और एग्रीकल्चर सेक्टर में सुधार की कोशिश करना था। इस दिन किसानों को नई टेक्नोलॉजी, सरकारी स्कीम और सस्टेनेबल खेती के बारे में जानकारी दी जाती है।
गौरतलब है कि चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर, 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मिडिल क्लास किसान परिवार में हुआ था। वे भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे। चौधरी चरण सिंह ने जीवन भर किसानों के हक़ और ग्रामीण विकास के लिए लड़ाई लड़ी। उत्तर प्रदेश में जमीन सुधारों का पूरा क्रेडिट उन्हें ही जाता है। उन्होंने 1939 के डिपार्टमेंटल डेब्ट रिलीफ बिल का ड्राफ्ट बनाने और उसे फाइनल करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे गांव के कर्जदारों को राहत मिली। उनकी कोशिशों की वजह से उत्तर प्रदेश में मंत्रियों की वेतन और उन्हें मिलने वाले अन्य लाभों को काफी कम कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री के तौर पर, उन्होंने 1960 के टेनेंसी एक्ट को लाने में भी अहम भूमिका निभाई। यह एक्ट ज़मीन की अधिकतम सीमा को कम करने के मकसद से लाया गया था, ताकि इसे पूरे राज्य में एक जैसा बनाया जा सके। अपनी सादगी और विचारों की दृढ़ता के लिए मशहूर चरण सिंह ने किसानों की उपज का उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए कई नीतियां बनाईं। उनके योगदान को सम्मान देते हुए 2024 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया।
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