Bihar Election Result : बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे कल घोषित होंगे। एनडीए हो या महागठबंधन दोनों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। इस बार राज्य में 67.13 प्रतिशत रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ है, जो 1951 से मतदारन का अब तक का सबसे ज्यादा आकड़ा है। 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में वोटिंग में 9 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। रिकार्ड वोटिंग ने हर खेमें में हलचल मचा रखी है। राजनीतिक विशेषज्ञ अपने अपने तरीके से इन बढ़े हुए वोटों का सियासी मतलब समझा रहे हैं।
राज्य की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन दो दशक से बिहार की सत्ता पर काबिज है। पीएम नरेंन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, गृहमंत्री अमित शाह अपने कामकाज और केंद्र की सरकार के विकास के एजेंडे पर वोट मांग रहे थे। दूसरी ओर महागठबंधन ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और परिवर्तन के मुद्दे उठाकर जनता से समर्थन मांगा। पिछले दो दिनों में आए 11 एग्जिट पोल में से ज्यादातर ने एनडीए की जीत का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि कुछ सर्वेक्षणों में मुकाबला बेहद कड़ा बताया जा रहा है। अगर इतिहास की बात की जाए तो बिहार में जब भी मतदान बढ़ा है, सत्ता परिवर्तन की संभावना बनी है। उदाहरण के तौर पर, 1967 में मतदान 44.5 प्रतिशत से बढ़कर 51.5 प्रतिशत हुआ था और कांग्रेस की सरकार गिर गई थी। जन क्रांति दल के महामाया प्रसाद सिन्हा ने तब मुख्यमंत्री का पद संभाला था।
वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि अधिक मतदान हमेशा सत्ता विरोधी लहर का संकेत नहीं होता। बिहार में यह प्रतिस्पर्धा और जनभागीदारी का सूचक भी हो सकता है। 2010 और 2020 दोनों चुनावों में उच्च मतदान के बावजूद एनडीए को बहुमत मिला था महिला मतदाताओं की भागीदारी इस बार भी बहुत महत्वपूर्ण और निर्णायक मानी जा रही है। चुनाव विशेषज्ञों की माने तो उनका कहना है कि अगर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया है तो इसका सीधा लाभ एनडीए को मिलने की संभावना है। 2020 में जिन 43 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोट डाले, उनमें से 37 सीटों पर जेडीयू को सफलता मिली थी। 2015 में एनडीए ने ऐसी 71 सीटों में से 61 पर जीत दर्ज की थी। 2010 में भी जहां महिलाओं ने बढ़चढ़ कर मतदान किया, वहां एनडीए को बढ़त मिली थी। इस बार युवा मतदाता अधिक सक्रिय रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि इसका फायदा महागठबंधन को मिल सकता है। अब सबकी निगाहें 14 नवंबर को आने वाले परिणामों पर हैं। यह तय करेगा कि बिहार नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली सरकार को दोबारा मौका देता है या सत्ता में बदलाव चाहता है।
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