जयपुरः केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह राजस्थान दौरे पर हैं। जहां उन्होंने कहा कि महाप्रभु आदिनाथ से लेकर उनके अनुयायियों तक इस संप्रदाय ने सनातन धर्म को स्थायित्व और मजबूती दी है। नाथ परंपरा में धूनी को आत्म-साक्षात्कार का साधन माना जाता है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पांच तत्वों को संतुलित करता है और आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार को राजस्थान के कोटपुतली में आयोजित 108 कुंडीय रुद्र महामृत्युंजय महायज्ञ में शामिल हुए।
शाह ने महायज्ञ में महापूर्णाहुति दी और सनातन सम्मेलन को भी संबोधित किया। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि बाबा बस्तीनाथ ने समाज के सभी वर्गों को जोड़कर एक साल तक लगातार यह आयोजन किया, जो एक बड़ा और प्रेरणादायी कार्य है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन पिछले साल रामनवमी पर शुरू हुआ था और इस साल रामनवमी पर संपन्न हुआ।
वर्ष भर प्रत्येक पांचवें दिन प्रकृति संरक्षण, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और आत्मशुद्धि के उद्देश्य से समाज के विभिन्न वर्गों के लोग यज्ञ में भाग लेते हैं। शाह ने इस यज्ञ को धर्म, समाज और पर्यावरण को जोड़ने वाला अनूठा प्रयास बताया। नाथ संप्रदाय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि महाप्रभु आदिनाथ से लेकर उनके अनुयायियों तक इस संप्रदाय ने सनातन धर्म को स्थायित्व और मजबूती दी है।
उन्होंने कहा कि नाथ परंपरा में धूनी को आत्मसाक्षात्कार का साधन माना गया है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंच तत्वों को संतुलित कर आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। उन्होंने बाबा बस्तीनाथ के आश्रम में पिछले 16 वर्षों से निरंतर यज्ञ के आयोजन की परंपरा की सराहना की। बाबा बालनाथ की समाधि को ऊर्जा का केंद्र मानते हुए शाह ने कहा कि इस स्थान ने न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया है, बल्कि असहाय और निराश लोगों को आशा और सहारा भी दिया है।
उन्होंने कहा कि इस धरती पर जन्मे बाबा बालनाथ जैसे महान योगियों ने भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी 84 धूणियों की स्थापना की और धार्मिक जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। अमित शाह ने कहा कि आज बाबा बस्तीनाथ अपने गुरु की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लोक धर्म, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता जैसे कार्यों में जुटे हैं। शाह ने कहा कि बाबा बस्तीनाथ ने अपने गुरु की तरह ही सेवा, तपस्या, वैराग्य और धार्मिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया है और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल धार्मिक परंपराएं मजबूत होती हैं, बल्कि सामाजिक सुधार और मानव कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
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