US Iran ceasefire sensex nifty surge: वैश्विक स्तर पर राहत भरी खबरों का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम की घोषणा के बाद बुधवार को बाजार में जोरदार तेजी दर्ज की गई। हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले और शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल देखने को मिली।
बाजार खुलते ही सेंसेक्स 2674.05 अंक यानी 3.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,290.63 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 ने 731.50 अंक यानी 3.2 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए 23,855.15 का स्तर छुआ। सुबह करीब 9:32 बजे सेंसेक्स 77,275.31 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि निफ्टी 23,896.60 तक पहुंच गया था।
दरअसल, बाजार में यह उछाल उस समय आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होता है, तो अमेरिका दो सप्ताह तक सैन्य कार्रवाई रोक सकता है। इस बयान ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता की उम्मीद जगाई, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। पिछले दो कारोबारी सत्रों में गिरावट झेलने के बाद निवेशकों ने इस खबर को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इससे बाजार में खरीदारी बढ़ी और लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
शुरुआती कारोबार में रियल एस्टेट, ऑटो, बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कई कंपनियों के शेयरों में 6 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 3.25 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 3.22 प्रतिशत की मजबूती आई। लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखी गई। वहीं बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX करीब 19 प्रतिशत गिर गया, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है।
निफ्टी 50 पैक में कई बड़े शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। इंडिगो, एलएंडटी, श्रीराम फाइनेंस, अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अदाणी एंटरप्राइजेज, बजाज फाइनेंस और मारुति सुजुकी जैसे शेयर टॉप गेनर्स में शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, विप्रो, सन फार्मा और हिंडाल्को जैसे शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई।
आज निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी टिकी हुई है। वित्त वर्ष 2027 के लिए पहली द्विमासिक नीति की घोषणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही बाजार में फिलहाल तेजी का माहौल है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। गिरावट के दौरान खरीदारी की रणनीति अपनाना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही आईटी, बैंकिंग और तेल-गैस सेक्टर पर खास नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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