हर महीने सिर्फ 10,000 रुपये की SIP से बन सकता है 1 करोड़ का फंड, जानिए कितने साल में पूरा होगा सपना
खबर सार :-
हर महीने 10,000 रुपये की नियमित एसआईपी और लंबी अवधि का निवेश कंपाउंडिंग की ताकत से 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार कर सकता है। हालांकि यह अनुमान 12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न पर आधारित है और वास्तविक रिटर्न बाजार पर निर्भर करेगा। इसलिए जल्द निवेश शुरू करें, अनुशासन बनाए रखें और लंबी अवधि तक निवेशित रहकर अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करें।
खबर विस्तार : -
SIP 10000 monthly investment : करोड़पति बनने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन अक्सर लोगों को लगता है कि इसके लिए बड़ी रकम निवेश करना जरूरी है। जबकि सच्चाई यह है कि यदि निवेश की शुरुआत समय पर कर दी जाए, हर महीने नियमित निवेश जारी रखा जाए और कंपाउंडिंग का पूरा लाभ लिया जाए, तो छोटी राशि से भी बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) इसी सिद्धांत पर काम करता है और लंबे समय में निवेशकों को बड़ी पूंजी बनाने का अवसर देता है। एसआईपी के जरिए निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में निवेश करता है। इससे बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर औसत हो जाता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि वित्तीय विशेषज्ञ नियमित और लंबी अवधि के निवेश को सबसे प्रभावी रणनीति मानते हैं।
10,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से 39 वर्षों तक निवेश
पॉलिसी के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी करता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो वह लगभग 39 वर्षों में 1 करोड़ रुपये से अधिक का फंड तैयार कर सकता है। यह गणना अनुमानित रिटर्न और मासिक कंपाउंडिंग के आधार पर की गई है। इस दौरान निवेशक अपनी जेब से कुल 46.80 लाख रुपये का निवेश करेगा। यानी 10,000 रुपये प्रति माह के हिसाब से 39 वर्षों तक निवेश करने पर इतनी राशि जमा होगी। वहीं, कंपाउंडिंग के कारण निवेश पर मिलने वाला अनुमानित लाभ करीब 54.70 लाख रुपये होगा। इस प्रकार निवेश अवधि पूरी होने पर कुल फंड लगभग 1.01 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड पूरी तरह बाजार आधारित निवेश है। इसलिए 12 प्रतिशत का रिटर्न केवल एक अनुमान है। वास्तविक रिटर्न बाजार की स्थिति, फंड के प्रदर्शन और निवेश अवधि के अनुसार अधिक या कम हो सकता है। इसलिए किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।
लंबी अवधि के निवेश में कंपाउंडिंग की सबसे बड़ी भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेश में सबसे बड़ी भूमिका कंपाउंडिंग निभाती है। कंपाउंडिंग का अर्थ है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है। यही प्रक्रिया समय के साथ आपकी पूंजी को तेजी से बढ़ाने में मदद करती है। इसलिए जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत की जाएगी, उतना ही अधिक समय कंपाउंडिंग को मिलेगा और अंतिम फंड भी बड़ा होगा। अगर कोई निवेशक कुछ वर्षों तक निवेश शुरू करने में देरी कर देता है, तो उसे उसी वित्तीय लक्ष्य तक पहुंचने के लिए या तो हर महीने अधिक राशि निवेश करनी होगी या फिर लक्ष्य हासिल करने में ज्यादा समय लगेगा। यही कारण है कि वित्तीय योजना में समय का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। बाजार में गिरावट आने पर कई निवेशक घबराकर एसआईपी बंद कर देते हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे सबसे बड़ी गलती मानते हैं। गिरावट के दौरान निवेश जारी रखने से कम कीमत पर अधिक यूनिट मिलती हैं, जिसका फायदा बाजार में सुधार आने पर मिलता है। इसलिए निवेश में अनुशासन बनाए रखना और लंबे समय तक निवेशित रहना बेहद जरूरी है।
सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है नियमित निवेश
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि केवल ऊंचे रिटर्न की उम्मीद करना पर्याप्त नहीं है। सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है नियमित निवेश, धैर्य और लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना। यही तीनों बातें मिलकर समय के साथ बड़ी संपत्ति बनाने में मदद करती हैं। यदि आपका लक्ष्य भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत बनना है, तो जल्द से जल्द एसआईपी शुरू करना एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। छोटी-छोटी मासिक बचत भी लंबे समय में करोड़ों रुपये के फंड का आधार बन सकती है, बशर्ते निवेश लगातार और अनुशासित तरीके से किया जाए।
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