NSE IPO Listing: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ अब सिर्फ पूंजी बाजार की बड़ी घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह कई सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए हजारों करोड़ रुपये के संभावित लाभ का द्वार भी बन सकता है। एनएसई द्वारा ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल किए जाने के बाद निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान उन संस्थानों पर केंद्रित हो गया है, जिन्होंने वर्षों पहले बेहद कम कीमत पर एनएसई में निवेश किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एलआईसी, बैंक ऑफ बड़ौदा, न्यू इंडिया एश्योरेंस, जीआईसी री और अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों को इस आईपीओ के जरिए भारी वित्तीय लाभ मिलने की संभावना है। खास बात यह है कि इनमें से कई संस्थानों ने एनएसई के शेयर कुछ पैसे या कुछ रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे, जिनकी संभावित बाजार कीमत अब हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
डीआरएचपी के अनुसार, एसबीआई ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत लगभग 2.475 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है। यदि आईपीओ का मूल्य करीब 2,000 रुपये प्रति शेयर तय होता है तो बैंक की इस हिस्सेदारी का मूल्य लगभग 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि एसबीआई ने इन शेयरों को औसतन सिर्फ 0.80 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदा था। ऐसे में यह निवेश बैंक के इतिहास के सबसे सफल निवेशों में से एक साबित हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा एसबीआई की बैलेंस शीट को मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मददगार हो सकता है।
हालांकि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने वाली संस्थाओं की सूची में शामिल नहीं है, लेकिन उसकी 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार का सबसे बड़ा आकर्षण बनी हुई है। एलआईसी एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक है। आईपीओ के बाद जब एनएसई का बाजार मूल्य स्पष्ट होगा, तब एलआईसी की हिस्सेदारी का वास्तविक मूल्य भी सामने आएगा। इससे निवेशकों को एलआईसी के पोर्टफोलियो की ताकत का बेहतर अंदाजा मिल सकेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यह एलआईसी के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएसई के शेयर औसतन मात्र 0.54 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे थे। अनुमानित आईपीओ मूल्य के आधार पर बैंक करीब 2,197 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेच सकता है। यह सौदा बैंक के लिए उल्लेखनीय पूंजीगत लाभ का स्रोत बन सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लाभ से बैंक की पूंजी स्थिति और मजबूत हो सकती है।
सरकारी बीमा कंपनियां भी इस आईपीओ से बड़े लाभ की उम्मीद कर रही हैं। न्यू इंडिया एश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने एनएसई के शेयर औसतन केवल 0.32 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे। अनुमानित मूल्यांकन के आधार पर न्यू इंडिया एश्योरेंस की हिस्सेदारी का मूल्य करीब 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लगभग 1,200 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेच सकती है। इसके अलावा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, जिसने एनएसई के शेयर लगभग 0.50 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे थे, वह भी करीब 1,200 करोड़ रुपये मूल्य की हिस्सेदारी बेच सकती है।
जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (जीआईसी री) ने एनएसई में अपने निवेश के लिए औसतन 5.26 रुपये प्रति शेयर की लागत चुकाई थी। प्रस्तावित आईपीओ के तहत कंपनी लगभग 2,131 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की हिस्सेदारी बेच सकती है। वहीं स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड भी करीब 2,178 करोड़ रुपये मूल्य की हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में है। कंपनी ने अपने शेयर औसतन सिर्फ 0.46 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर खरीदे थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि एनएसई में शुरुआती निवेश करने वाले संस्थानों को अब असाधारण रिटर्न मिलने की संभावना है।
एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है और वर्षों से इसके आईपीओ का इंतजार किया जा रहा था। डीआरएचपी दाखिल होने के साथ ही इस प्रक्रिया ने नई गति पकड़ ली है। प्रस्तावित लिस्टिंग के बाद एनएसई के शेयरों का कारोबार बीएसई पर होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एनएसई का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास के सबसे चर्चित और महत्वपूर्ण सार्वजनिक निर्गमों में शामिल हो सकता है। इससे न केवल निवेशकों को एक मजबूत एक्सचेंज में निवेश का अवसर मिलेगा, बल्कि लंबे समय से निवेशित संस्थानों की वास्तविक संपत्ति का मूल्य भी सामने आएगा।
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