Indian Stock Market में बदला सत्ता संतुलन, डीआईआई बने सबसे मजबूत खिलाड़ी

खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार में डीआईआई की बढ़ती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि घरेलू निवेशक अब बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एफआईआई की घटती भागीदारी के बावजूद बाजार में स्थिरता बनी हुई है, जो मजबूत घरेलू पूंजी प्रवाह का परिणाम है। यह बदलाव लंबे समय तक बाजार को मजबूती प्रदान कर सकता है।

Indian Stock Market में बदला सत्ता संतुलन, डीआईआई बने सबसे मजबूत खिलाड़ी
खबर विस्तार : -

DII Investment: भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की हिस्सेदारी अब 20 प्रतिशत के पार पहुंच गई है, जिससे बाजार में उनकी भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। सोमवार को जारी मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में गहरे परिवर्तन का संकेत देता है।

शेयर बाजार में 23.4 अरब डॉलर का निवेश

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में डीआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में 23.4 अरब डॉलर का निवेश किया। पूरे साल के लिहाज से देखें तो यह निवेश 90.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा बाजार पर लगातार मजबूत हो रहा है, भले ही वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हों।

DII की आक्रामक खरीदारी

डीआईआई की आक्रामक खरीदारी ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया है। वर्ष 2025 में एफआईआई ने करीब 18.8 अरब डॉलर की शुद्ध बिकवाली की थी। इसके बावजूद बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई, जिसका श्रेय घरेलू पूंजी के मजबूत प्रवाह को दिया जा रहा है।

आईपीओ और एफपीओ से जुटाए करोड़ों रुपये

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डीआईआई ने आईपीओ और एफपीओ के जरिए कंपनियों द्वारा जुटाई गई भारी-भरकम राशि को भी सहारा दिया। वर्ष 2024-25 में कंपनियों ने प्राथमिक बाजार से लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जिसमें घरेलू संस्थागत निवेशकों की भूमिका बेहद अहम रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब भारतीय कंपनियां पूंजी जुटाने के लिए केवल विदेशी निवेश पर निर्भर नहीं हैं।

DII-FII Investment

डीआईआई की हिस्सेदारी में लगातार इजाफा

आंकड़ों के अनुसार, 2021 के बाद से डीआईआई की हिस्सेदारी में लगातार इजाफा हो रहा है। निफ्टी 500 में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि एफआईआई की हिस्सेदारी घटकर 18.4 प्रतिशत पर आ गई है। बीते एक साल में डीआईआई की हिस्सेदारी में 2.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं तिमाही आधार पर इसमें 0.60 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके उलट, एफआईआई की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 0.50 प्रतिशत घटी है, हालांकि तिमाही आधार पर इसमें मामूली 0.10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। दिसंबर 2025 तिमाही तक डीआईआई के पास निफ्टी 50 में लगभग 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जबकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत रही।

वर्ष 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपये का SIP निवेश

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि एफआईआई की हिस्सेदारी पिछले आठ तिमाहियों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, जबकि घरेलू निवेश में लगातार मजबूती आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव अस्थायी नहीं बल्कि संरचनात्मक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपये का एसआईपी निवेश, पेंशन फंड्स की बढ़ती भागीदारी और नई एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के प्रवेश ने घरेलू निवेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे भारतीय शेयर बाजार अब पहले की तुलना में ज्यादा आत्मनिर्भर और स्थिर बनता जा रहा है।

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