Middle East Crisis Impact: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,942.22 अंक टूटा, निफ्टी 580 अंक

खबर सार :-
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को गहरे दबाव में ला दिया है। जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की जरूरत है।

Middle East Crisis Impact: भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,942.22 अंक टूटा, निफ्टी 580 अंक
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Indian Stock Market Crashed Today: मुंबई: गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने भारी गिरावट के साथ शुरुआत की, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया। वैश्विक तनाव, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1,942.22 अंक यानी 2.55 प्रतिशत गिरकर 74,750.92 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 580 अंक या 2.4 प्रतिशत टूटकर 23,197.75 पर कारोबार करता नजर आया।

हर सेक्टर में बिकवाली, बाजार में चौतरफा दबाव

बाजार में गिरावट केवल चुनिंदा सेक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। रियल्टी, प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, डिफेंस और मेटल सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है और वे जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी नहीं बचे

गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,194.40 अंक यानी 2.12 प्रतिशत गिरकर 55,095.45 पर आ गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.50 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 15,930.95 पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हो रही है।

लाल निशान में पहुंचे सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, एक्सिस बैंक, एमएंडएम, ट्रेंट, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे दिग्गज शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। केवल एनटीपीसी और पावर ग्रिड जैसे चुनिंदा शेयर ही हरे निशान में बने रहे।

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव बना बड़ी वजह

बाजार की इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ता तनाव है। अमेरिका और इजराइल द्वारा दक्षिणी ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड और असालुयेह क्षेत्र पर एयरस्ट्राइक के बाद हालात बिगड़ गए। इसके जवाब में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट ‘रास लफान’ पर मिसाइल हमला किया। इन घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।

वैश्विक बाजारों में भी नकारात्मक रुख

भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखी गई। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल के बाजार लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। वहीं, अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डाओ 1.63 प्रतिशत और नैस्डैक 1.46 प्रतिशत नीचे रहे।

एफआईआई की बिकवाली से बढ़ा दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। बुधवार को एफआईआई ने 2,714.35 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,253.03 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके बावजूद बाजार में गिरावट नहीं रुकी, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

 

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