45 करोड़ की अनियमितता के आरोपों पर एचडीएफसी बैंक का जवाब: ‘सभी दावे बेबुनियाद, मजबूत निगरानी व्यवस्था मौजूद’

खबर सार :-
एचडीएफसी बैंक ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बैंक में मजबूत निगरानी और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली लागू है। रिपोर्टों के चलते शेयर बाजार में दबाव जरूर देखने को मिला, लेकिन बैंक ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सभी प्रक्रियाएं स्थापित मानकों के तहत संचालित होती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर बाजार और नियामकों की नजर बनी रह सकती है।
45 करोड़ की अनियमितता के आरोपों पर एचडीएफसी बैंक का जवाब: ‘सभी दावे बेबुनियाद, मजबूत निगरानी व्यवस्था मौजूद’
खबर विस्तार : -

HDFC Bank Statement: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। बैंक ने बुधवार को स्पष्ट कहा कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह भ्रामक हैं और सभी मामलों को तय प्रक्रियाओं एवं आंतरिक नियंत्रण तंत्र के तहत संभाला जाता है।

बैंक का यह बयान उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (ACB) ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी Maharashtra State Road Development Corporation से जुड़े 45 करोड़ रुपए के भुगतान मामले में आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं।

बैंक ने कहा-मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली लागू

एचडीएफसी बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि बैंक मजबूत आंतरिक निरीक्षण, ऑडिट और नियंत्रण प्रक्रियाओं का पालन करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंतरिक समीक्षा या शिकायत के मामले में स्थापित मानकों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई जाती है और तथ्यों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। बैंक ने यह भी कहा कि चुनिंदा जानकारी के आधार पर किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी का अनुमान लगाना गलत है। प्रवक्ता के अनुसार, बैंक की सभी वित्तीय प्रक्रियाएं नियामकीय मानकों और आंतरिक अनुपालन नीतियों के अनुरूप संचालित होती हैं।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान एमएसआरडीसी को किए गए लगभग 45 करोड़ रुपए के भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि यह भुगतान एजेंसी द्वारा बैंक में जमा की गई राशि पर अलग-अलग ब्याज दरों से जुड़ा हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह रकम सीधे ब्याज भुगतान के रूप में ट्रांसफर किए जाने के बजाय बैंक के मार्केटिंग विभाग के जरिए भेजी गई। आरोप यह भी लगाया गया कि चार स्थानीय विक्रेताओं के माध्यम से इस राशि को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में योगदान के रूप में दिखाया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है और कहा है कि सभी गतिविधियां स्थापित प्रक्रियाओं के तहत की जाती हैं।

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वरिष्ठ प्रबंधन के नाम आने से बढ़ी चर्चा

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इस व्यवस्था को लेकर बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर चर्चा हुई थी और इसमें बैंक के एमडी एवं सीईओ शशिधर जगदीशन की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया। हालांकि बैंक ने इस दावे पर अलग से कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन अपने आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी मामले को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय संस्थानों से जुड़े मामलों में ऐसी रिपोर्टें बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए कंपनियां अक्सर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर निवेशकों का भरोसा बनाए रखने की कोशिश करती हैं।

शेयर बाजार में दिखा असर

इन खबरों के सामने आने के बाद शेयर बाजार में एचडीएफसी बैंक के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। बुधवार दोपहर करीब 2:50 बजे बैंक का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर लगभग 2.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 757.90 रुपए पर कारोबार कर रहा था। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और अनुपालन से जुड़े मुद्दों को निवेशक बेहद गंभीरता से लेते हैं। ऐसे मामलों में स्पष्टीकरण आने तक शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि एचडीएफसी बैंक की मजबूत बैलेंस शीट, व्यापक ग्राहक आधार और लंबे समय से बनी विश्वसनीयता उसे बाजार में मजबूत स्थिति प्रदान करती है।

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