Gold Silver Prices: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और यूरोप पर टैरिफ लगाए जाने की आशंका कमजोर पड़ने के बीच गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे दोनों कीमती धातुओं पर मुनाफावसूली और डॉलर में मजबूती का दबाव साफ नजर आया। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग घटने से बाजार में नरमी देखने को मिली।
लगातार तीन कारोबारी सत्रों तक तेजी दिखाने के बाद गुरुवार को सोने की कीमत में करीब एक प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं चांदी भी अपने ऑल-टाइम हाई से नीचे फिसल गई। निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफा बुक करना शुरू किया, जिससे कीमतों पर असर पड़ा।
बुधवार को एमसीएक्स पर गोल्ड फरवरी वायदा 1,58,475 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। वहीं सिल्वर मार्च वायदा 3,35,521 रुपये प्रति किलोग्राम के अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंची थी। दोपहर तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,022 रुपये या 0.67 प्रतिशत टूटकर 1,51,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 1,992 रुपये या 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,16,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने के दाम नीचे आते दिखे। अमेरिकी बाजार में सोना 4,790 से 4,800 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया। इसी हफ्ते की शुरुआत में सोना 4,887 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली का परिणाम है, जबकि लंबी अवधि में सोने की मजबूती बरकरार रह सकती है।
फ्यूचर्स बाजार के आंकड़ों के अनुसार, खुले सौदों (ओपन इंटरेस्ट) में कमी आई है। इसका संकेत यह है कि कुछ निवेशक अपनी पुरानी खरीदारी से बाहर निकल रहे हैं और फिलहाल नई खरीद सीमित है। इससे अल्पकालिक दबाव बना हुआ है।
हालांकि गिरावट के बावजूद चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत बनी हुई है और 92 से 93 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में कारोबार कर रही है। हाल ही में चांदी ने 95.80 डॉलर का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ती औद्योगिक मांग चांदी को मजबूत सपोर्ट दे रही है। इसके साथ ही सुरक्षित निवेश के तौर पर भी इसकी मांग बनी हुई है।
अमेरिकी डॉलर में मजबूती भी सोने-चांदी पर दबाव का एक बड़ा कारण रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद कि ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ नहीं लगाया जाएगा, डॉलर इंडेक्स बढ़कर 98.81 पर पहुंच गया। डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे मांग प्रभावित होती है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नाटो प्रमुख के साथ इस विषय पर भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई है। इस बयान से भू-राजनीतिक जोखिम कम हुआ और सुरक्षित निवेश की जरूरत घट गई।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़ों पर टिकी है, जो आगे सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व जनवरी के अंत में होने वाली बैठक में ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, साल के अंत तक दो बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई जा रही है, जिससे लंबी अवधि में सोने को फिर सहारा मिल सकता है।
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