कीमती धातुओं में तेज झटका: उछाल के बाद फिसला सोना-चांदी, डॉलर की मजबूती बनी वजह

खबर सार :-
सोना और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट मुख्य रूप से डॉलर की मजबूती और अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के कारण आई है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के चलते लंबी अवधि का रुख सकारात्मक माना जा रहा है। निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाना और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है।

कीमती धातुओं में तेज झटका: उछाल के बाद फिसला सोना-चांदी, डॉलर की मजबूती बनी वजह
खबर विस्तार : -

MCX Gold: कमोडिटी बाजार में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार की भारी गिरावट के बाद बुधवार को सोना और चांदी में जोरदार तेजी आई थी, लेकिन गुरुवार के कारोबारी सत्र में फिर हल्की कमजोरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी डॉलर में मजबूती और मजबूत रोजगार आंकड़ों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।

एमसीएक्स पर सोने की कीमतों में गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना गिरकर 1,57,701 रुपये प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी भी फिसलकर 2,58,730 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक आ गई। हालांकि खबर लिखे जाने तक सुबह करीब 11:51 बजे, एमसीएक्स पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 0.24 प्रतिशत यानी 378 रुपये की गिरावट के साथ 1,58,377 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी 0.39 प्रतिशत यानी 1,015 रुपये टूटकर 2,62,003 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती का असर

भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स 96.83 से बढ़कर 96.94 पर पहुंच गया। अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने डॉलर को सहारा दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसे कीमती धातु अन्य मुद्राओं में महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। जनवरी में अमेरिका में उम्मीद से अधिक नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी श्रम बाजार मजबूत स्थिति में है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती से बच सकता है या उन्हें स्थिर रख सकता है, जिससे डॉलर को और समर्थन मिल सकता है।

रोजगार आंकड़ों पर विश्लेषकों की राय

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषक मानव मोदी ने बताया कि पिछले 13 महीनों में नौकरी वृद्धि का आंकड़ा मजबूत दिखा, लेकिन संशोधित आंकड़ों के अनुसार 2025 में पहले बताए गए 5,84,000 नौकरियों की तुलना में केवल 1,81,000 नौकरियां ही वास्तविक रूप से जुड़ीं। इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

भू-राजनीतिक तनाव से पहले मिली थी तेजी

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से सोना-चांदी की कीमतों में उछाल देखा गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत के बाद यह स्पष्ट हुआ कि ईरान को लेकर कोई निर्णायक समझौता नहीं हुआ है। हालांकि दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने की बात कही है। ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।

तकनीकी स्तर: कहां मिल सकता है सहारा

विश्लेषकों के अनुसार घरेलू बाजार में सोने को 1,56,000 रुपये के स्तर पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,60,500 रुपये के आसपास रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोना 5000 से 5150 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है, जो पहले 5500 से 5600 डॉलर के उच्च स्तर से नीचे आ चुका है। कॉमेक्स में चांदी 80 से 87 डॉलर के दायरे में बनी हुई है, जबकि यह पहले 121 डॉलर से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेश दोनों के कारण लंबी अवधि में चांदी की संभावनाएं मजबूत बनी रह सकती हैं, हालांकि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

इन आंकड़ों पर नजर रखने की जरूरत

निवेशक अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और ब्रिटेन के जीडीपी डेटा पर नजर टिकाए हुए हैं। इन आंकड़ों से वैश्विक ब्याज दरों की दिशा और डॉलर की चाल पर असर पड़ सकता है, जिससे सोना-चांदी की कीमतों में नई दिशा देखने को मिल सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में सोने का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है और हाल की गिरावट मुनाफावसूली का नतीजा हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय प्रमुख आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए।

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