Business Tips: अधिकार, जोखिम और रिटर्न का खेल, निवेश से पहले रहें सतर्क, जानें कौन सा शेयर आपके लिए सही??

खबर सार :-
शेयर बाजार में सफलता सिर्फ रिटर्न देखने से नहीं, बल्कि सही विकल्प चुनने से मिलती है। इक्विटी शेयर अधिक जोखिम के साथ ऊंचा रिटर्न दे सकते हैं, जबकि प्रेफरेंस शेयर स्थिर और सुरक्षित आय प्रदान करते हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, समय सीमा और जोखिम सहनशीलता का आकलन करना जरूरी है। समझदारी से किया गया चयन ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।

Business Tips: अधिकार, जोखिम और रिटर्न का खेल, निवेश से पहले रहें सतर्क, जानें कौन सा शेयर आपके लिए सही??
खबर विस्तार : -

Share Market Tips : शेयर बाजार में कदम रखते समय अधिकतर निवेशक इस बात पर ध्यान देते हैं कि कितना रिटर्न मिलेगा, लेकिन यह समझना उतना ही जरूरी है कि निवेश किस तरह के शेयर में किया जा रहा है। खासतौर पर इक्विटी शेयर और प्रेफरेंस शेयर के बीच का अंतर समझना हर निवेशक के लिए बेहद अहम है। दोनों ही कंपनी में हिस्सेदारी का अवसर देते हैं, लेकिन इनके अधिकार, जोखिम और लाभ वितरण की प्रक्रिया अलग होती है। सही जानकारी के अभाव में किया गया निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।

क्या होते हैं इक्विटी शेयर?

इक्विटी शेयर, जिन्हें कॉमन या साधारण शेयर भी कहा जाता है, किसी कंपनी में वास्तविक स्वामित्व का अधिकार देते हैं। जब कोई निवेशक इक्विटी शेयर खरीदता है, तो वह कंपनी का आंशिक मालिक बन जाता है। उसे कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में वोट देने का अधिकार मिलता है और कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी का मौका भी मिलता है। इक्विटी शेयरधारकों को कंपनी के मुनाफे में हिस्सा डिविडेंड के रूप में मिलता है, लेकिन यह तय नहीं होता। डिविडेंड कंपनी के प्रदर्शन और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के फैसले पर निर्भर करता है। यदि कंपनी को अधिक लाभ होता है तो डिविडेंड ज्यादा मिल सकता है, और नुकसान की स्थिति में नहीं भी मिल सकता। इसी वजह से इक्विटी शेयर में रिटर्न की संभावना अधिक होती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी ज्यादा रहता है। बाजार के उतार-चढ़ाव का सीधा असर इक्विटी शेयर की कीमत पर पड़ता है। हालांकि, लंबी अवधि में यह निवेश संपत्ति निर्माण का प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।

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क्या होते हैं प्रेफरेंस शेयर?

प्रेफरेंस शेयर निवेशकों को प्राथमिकता का अधिकार देते हैं। इसका अर्थ है कि कंपनी जब डिविडेंड बांटती है, तो सबसे पहले प्रेफरेंस शेयरधारकों को भुगतान किया जाता है। आमतौर पर इन शेयरों पर डिविडेंड की दर पहले से तय होती है, जिससे निवेशकों को अपेक्षाकृत स्थिर आय मिलती है। अगर कंपनी बंद होती है या दिवालिया होती है, तो उसकी संपत्तियों की बिक्री से मिलने वाली राशि में भी प्रेफरेंस शेयरधारकों को इक्विटी निवेशकों से पहले भुगतान मिलता है। हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में इन्हें वोटिंग का अधिकार नहीं मिलता। इस प्रकार, प्रेफरेंस शेयर अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला निवेश विकल्प माना जाता है, लेकिन इसमें ग्रोथ की संभावना सीमित रहती है।

Business Tips: मुख्य अंतर क्या है?

इक्विटी और प्रेफरेंस दोनों शेयरों के बीच सबसे बड़ा अंतर अधिकार, जोखिम और रिटर्न का है।

इक्विटी शेयर: अधिक जोखिम, अनिश्चित लेकिन संभावित रूप से ज्यादा रिटर्न, वोटिंग अधिकार।

प्रेफरेंस शेयर: कम जोखिम, निश्चित डिविडेंड, लेकिन वोटिंग अधिकार नहीं।

इक्विटी निवेशक कंपनी के विकास से सीधे लाभान्वित होते हैं, जबकि प्रेफरेंस निवेशक स्थिर आय पर ध्यान देते हैं।

कौन सा विकल्प बेहतर है?

यह पूरी तरह निवेशक की जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है। यदि आप लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि चाहते हैं और बाजार की अस्थिरता सह सकते हैं, तो इक्विटी शेयर आपके लिए बेहतर हो सकते हैं। वहीं, यदि आप नियमित और अपेक्षाकृत सुरक्षित आय चाहते हैं, तो प्रेफरेंस शेयर उपयुक्त विकल्प साबित हो सकते हैं। स्मार्ट निवेशक अक्सर अपने पोर्टफोलियो में दोनों का संतुलन बनाकर जोखिम और रिटर्न के बीच सही तालमेल बैठाते हैं।

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