वैश्विक तनाव की आग में तपकर चमका सोना-चांदी, कीमतों ने बनाया इतिहास

खबर सार :-
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ नीति और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने सोने-चांदी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। भले ही अल्पकाल में मुनाफावसूली से हल्का उतार-चढ़ाव आए, लेकिन सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिक उपयोग के चलते लंबी अवधि में कीमती धातुओं का भविष्य मजबूत नजर आ रहा है।

वैश्विक तनाव की आग में तपकर चमका सोना-चांदी, कीमतों ने बनाया इतिहास
खबर विस्तार : -

MCX Gold Silver Rate: बढ़ते वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। मंगलवार के कारोबारी सत्र में दोनों कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड स्तर छू लिए। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचाव की मानसिकता ने सुरक्षित निवेश विकल्पों यानी सेफ-हेवन एसेट्स की मांग को तेज कर दिया है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा।

एमसीएक्स पर सोना-चांदी नए शिखर पर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,47,996 रुपए प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,19,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। यह स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर माने जा रहे हैं। इससे एक दिन पहले भी दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन मंगलवार को उन स्तरों को भी पीछे छोड़ दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखी तेजी

केवल घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं की चमक बरकरार रही। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 4,708.10 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। वहीं चांदी 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इससे पहले के सत्र में सोना 4,689.39 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड पर था, जिसे इस सत्र में पार कर लिया गया।

ट्रंप के बयानों से बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड से जुड़े बयानों और टैरिफ की धमकियों ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने यूरोप से आने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी भी दोहराई। इन बयानों से निवेशकों में डर बढ़ा और उन्होंने सोने-चांदी में निवेश को प्राथमिकता दी।

यूरोप की प्रतिक्रिया और बढ़ती सैन्य गतिविधियां

ट्रंप के रुख पर यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय संघ के ‘एंटी-कोएरशन’ तंत्र को लागू करने की मांग की है। वहीं जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संयम बरतने की अपील की। इसके अलावा, डेनमार्क द्वारा ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के फैसले ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।

फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों की भूमिका

बाजार इस बात पर भी नजर रखे हुए हैं कि कहीं ट्रंप प्रशासन अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर कोई कदम तो नहीं उठाएगा। इससे निवेशकों में चिंता बढ़ी है। साथ ही, अमेरिका में आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी सोने और चांदी को मजबूती दे रही हैं। कम ब्याज दरें आमतौर पर कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं।

चांदी की औद्योगिक मांग ने बढ़ाई चमक

विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में आई तेजी केवल सुरक्षित निवेश का नतीजा नहीं है, बल्कि इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग भी अहम भूमिका निभा रही है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि कॉमेक्स पर 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में मजबूत सपोर्ट दे सकता है।

मुनाफावसूली की आशंका, लेकिन रुझान मजबूत

ऑगमोंट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, तेज बढ़त के बाद कुछ मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है, जिससे चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या 2,60,000 रुपए प्रति किलो तक फिसल सकती है। हालांकि, आपूर्ति की चिंताओं और मजबूत औद्योगिक मांग के चलते लंबे समय में सोने और चांदी का रुझान सकारात्मक बना रहने की संभावना है।

 

 

 

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