सोशल मीडिया अफवाहों पर सख्ती: थानों से एटीएस तक मजबूत होगी मॉनिटरिंग, हर जिले में बनेगी गोपनीय डायरी

खबर सार :-

पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के थानों को कट्टरपंथी, अतिवामपंथी, सांप्रदायिक तनाव और संदिग्ध गतिविधियों की सत्यापित जानकारी जुटाकर गोपनीय डायरी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट हर माह पुलिस मुख्यालय और एटीएस को भेजी जाएगी।
सोशल मीडिया अफवाहों पर सख्ती: थानों से एटीएस तक मजबूत होगी मॉनिटरिंग, हर जिले में बनेगी गोपनीय डायरी

खबर विस्तार : -

झांसीः सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों, सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों और कट्टरपंथी नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी जिलों के थानों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में कट्टरपंथी, अतिवामपंथी, जातीय एवं सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली गतिविधियों के साथ-साथ अन्य संदिग्ध और अवैध नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं का नियमित संकलन कर एक गोपनीय डायरी तैयार करें। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर मिलने वाले इनपुट के आधार पर समय रहते कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित खतरों की पहचान करना और उन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

मुख्यालय भेजी जाएगी रिपोर्ट

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक थाने में सत्यापित सूचनाओं के आधार पर व्यक्तियों, समूहों और संगठनों की गतिविधियों का साप्ताहिक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इन सूचनाओं के संकलन की जिम्मेदारी स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) को सौंपी गई है। इसके बाद प्रत्येक माह की 5 तारीख तक विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजी जाएगी। रिपोर्ट की एक प्रति आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) को भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि संवेदनशील मामलों में समय रहते कानूनी कार्रवाई की जा सके।

झांसी बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रमुख जिला होने के साथ-साथ मध्य प्रदेश की सीमा से भी जुड़ा हुआ है। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र संवेदनशील माना जाता है। यहां पहले से ही जिला पुलिस, स्थानीय अभिसूचना इकाई और अन्य सुरक्षा एजेंसियां धार्मिक आयोजनों, संवेदनशील गतिविधियों तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अफवाहों पर लगातार नजर रखती रही हैं। अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद थाना स्तर पर इन सूचनाओं का दस्तावेजीकरण अधिक व्यवस्थित और साक्ष्य आधारित होगा।

पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार गोपनीय डायरी में केवल सत्यापित सूचनाओं को ही दर्ज किया जाएगा। इसके लिए बीट पुलिसकर्मी, चौकी प्रभारी, मुखबिर तंत्र और एलआईयू से प्राप्त सूचनाओं का मिलान और सत्यापन किया जाएगा। प्रत्येक सप्ताह इन जानकारियों को अद्यतन किया जाएगा, जबकि मासिक रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

इस मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत जिन विषयों पर विशेष नजर रखी जाएगी, उनमें कट्टरपंथी और अतिवामपंथी गतिविधियां, जातीय एवं सांप्रदायिक तनाव से जुड़ी घटनाएं, संदिग्ध बैठकें, भड़काऊ गतिविधियां, स्थानीय स्तर पर प्राप्त खुफिया इनपुट, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट और अफवाहों से जुड़े सत्यापित तथ्य शामिल हैं। इन सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया जाएगा, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि कई बार स्थानीय स्तर पर मिलने वाली छोटी-छोटी सूचनाएं बड़े नेटवर्क या गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाओं की शुरुआती कड़ी साबित होती हैं। ऐसे में व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और नियमित समीक्षा से सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में अधिक आसानी होगी।

इस नई व्यवस्था से उम्मीद जताई जा रही है कि सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली अफवाहों, सांप्रदायिक तनाव और दंगा-फसाद जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही कानून विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ समय पर कार्रवाई कर आम जनता की सुरक्षा और शांति व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

इस संबंध में झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) बी. बी. जी. टी. एस. मूर्ति ने कहा कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली छोटी-छोटी सूचनाएं कई बार बड़े नेटवर्क या कानून-व्यवस्था से जुड़े खतरे की शुरुआती कड़ी होती हैं। इसलिए थाना स्तर पर व्यवस्थित दस्तावेजीकरण से खुफिया तंत्र और अधिक प्रभावी होगा तथा सुरक्षा एजेंसियां समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगी।

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