फेसबुक पर फर्जी बैंक विज्ञापन दिखाकर 12 लाख की साइबर ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार

खबर सार :-
फेसबुक पर पेंशनभोगियों को निशाना बनाकर नकली विज्ञापन दिखाने और साइबर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने झारखंड के कोडरमा जिले से गिरोह के दो शातिर सदस्यों, धीरज कुमार और रवि मेहता, को गिरफ्तार किया है।
फेसबुक पर फर्जी बैंक विज्ञापन दिखाकर 12 लाख की साइबर ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
खबर विस्तार : -

सोनभद्र: सोनभद्र साइबर पुलिस ने फेसबुक पर फर्जी बैंक विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को झांसे में लेकर साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने झारखंड के कोडरमा जिले से गिरोह के दो सदस्यों धीरज कुमार और रवि मेहता को दबोचा है। आरोपियों पर पेंशनरों और बैंक ग्राहकों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप है।

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब आजमगढ़ निवासी एवं वर्तमान में सोनभद्र जिला अस्पताल परिसर में रह रहे डॉ. प्रेम बहादुर गौतम ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार उनके फेसबुक अकाउंट पर इंडसइंड बैंक के नाम से पेंशन संबंधी एक आकर्षक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में दिए गए लिंक को उन्होंने बैंक की आधिकारिक सेवा समझकर खोल लिया और मांगी गई बैंकिंग तथा व्यक्तिगत जानकारी साझा कर दी।

जानकारी साझा करने के कुछ ही समय बाद साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 12 लाख रुपये निकाल लिए। इनमें 5-5 लाख रुपये के दो ट्रांजेक्शन और 2 लाख रुपये का एक अन्य ट्रांजेक्शन शामिल था। खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने तत्काल साइबर पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी जांच, बैंक खातों के लेनदेन का विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल तथा सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच के दौरान मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर पुलिस ने झारखंड के कोडरमा जिले में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से एक पीओएस मशीन, एक कार, कई डेबिट और क्रेडिट कार्ड तथा चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों को बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं के नाम पर झांसे में लेता था तथा उनसे गोपनीय जानकारी हासिल कर खातों से रकम निकालता था।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी भी बैंकिंग लिंक, विज्ञापन या ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी बैंकिंग, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें और साइबर ठगी की आशंका होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें।

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