Mumbai Water Crisis: मुंबई में मॉनसून की मार, समंदर किनारे बसी मायानगरी क्यों तरस रही पानी के लिए?
खबर सार :-
देश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाली मायानगरी में इन दिनों लोग पानी की किल्लत से जुझ रहे हैं। मॉनसून के कारण बारिश में हुई देरी के कारण लोगों को इस मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
खबर विस्तार : -
Mumbai Water Crisis: मुंबई में इन दिनों लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। मॉनसून की बारिश में हुई देरी के वजह से मायानगरी में केवल 9.65 प्रतिशत ही पानी बचा है। इस दौरान कुएं सुखने और टैंकरों की सप्लाई में 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। BMC ने कंस्ट्रक्शन साइट्स, स्विमिंग पूल, स्पोर्ट्स क्लब, फैक्ट्रियों और कमर्शियल जगहों पर पानी की सप्लाई में कटौती के निर्देश दिए हैं।
Mumbai Water Crisis: कमर्शियल जगहों पर पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में इस बार अल नीनो ने मॉनसून की दिशा बदल दी है। इस बार मायानगरी में बारिश होने में काफी देरी हो गई है। हाल ऐसा है कि शहर की प्यास बुझाने वाली 7 झीलों में अब सिर्फ 10.3 प्रतिशक ही पानी बचा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कई झीलों में पानी सूख चुका है, जिसको मद्देनजर रखते हुए BMC ने ठोस कदम उठाया है। बीते मंगलवार को BMC ने ऐसान किया कि कंस्ट्रक्शन साइट्स, स्विमिंग पूल, स्पोर्ट्स क्लब, फैक्ट्रियों और कमर्शियल जगहों पर पानी की सप्लाई में 20 प्रतिशत की कटौती करेंगें। यह नियम बुधवार से लागू हो गए हैं।
Mumbai Water Crisis:नए जल कनेक्शन की स्वीकृति पर रोक
इसके साथ ही नगर निगम का यह भी कहना है कि आगामी आदेशों तक निर्माण कार्यों के लिए किसी भी नए जल कनेक्शन की स्वीकृति पर रोक लगा दी गई है। कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर बनाने वाले प्लांटों में उनके कर्मचारियों के पीने के लिए पानी मिलेगा। बता दें कि मुंबई और आस-पास के इलाकों में हर रोज औसतन 4,664 मिलियन लीटर पानी की खपत होती है। लेकिन पानी के महामारी के कारण सभी स्रोतों से मिलाकर केवल 4,1000 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति हो पा रही है।
Mumbai Water Crisis:15 मई से 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू- BMC
इस हालात को मद्देनजर रखते हुए BMC ने 15 मई को ही 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर दी थी। मानसून में विलंब के कारण, उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक दिनों तक प्रबंधन करना नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। मिली जानकारी के अनुसार पब्लिक टॉयलेट्स चलाने वाली संस्थाओं को अब पीने के पानी की जगह टैंकर या बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही गाड़ियों को धोने, बगीचों में पेड़-पौधों को पानी देने और सड़कों की सफाई के लिए कुएं या बोरवेल का सहारा लेना होगा।
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