खारी-मानसी की छाती छलनी! एनजीटी के आदेश पर फूलियाकलां में अवैध बजरी खनन की बड़ी जांच
खबर सार :-
NGT के आदेशों के बाद फुलियाकलां में जांच शुरू हुई है प्रशासनिक अधिकारी अवैध बजरी खनन से निपटने के लिए सक्रिय हो गए हैं, ग्रामीणों की मौजूदगी में नदी किनारों का निरीक्षण कर रहे हैं।
खबर विस्तार : -
शाहपुरा: फूलियाकलां क्षेत्र की जीवनदायिनी खारी और मानसी नदियों में कथित अवैध बजरी खनन का मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के बाद सोमवार को संयुक्त जांच टीम ने क्षेत्र में पहुंचकर नदी किनारों और खनन स्थलों का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी से पूरे इलाके में हलचल मच गई, वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए।
सामाजिक कार्यकर्ता हबीब ने लगाए थे आरोप
संयुक्त जांच टीम में जिला प्रशासन, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल रहे। जिला कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में शाहपुरा एडीएम प्रकाशचंद्र रेगर ने जांच का नेतृत्व किया। टीम ने खारी और मानसी नदी के कई हिस्सों का दौरा कर वहां चल रही खनन गतिविधियों की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने नदी के बहाव क्षेत्र, खनन के निशान, रास्तों और मशीनों से जुड़े तथ्यों की बारीकी से जांच की।
जानकारी के अनुसार यह मामला उस समय सामने आया जब सामाजिक कार्यकर्ता हबीब मोहम्मद नीलगर ने एनजीटी में याचिका दायर कर दोनों नदियों में बड़े पैमाने पर अवैध बजरी खनन का आरोप लगाया। याचिका में कहा गया कि लीज धारक द्वारा पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि लगातार बजरी दोहन से नदी की जलधारा प्रभावित हो रही है और पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ रहा है।
एनजीटी ने मामले को गंभीर मानते हुए संयुक्त जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और मौके पर जांच शुरू की गई। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। स्थानीय लोगों का कहना है कि खारी और मानसी नदी क्षेत्र की जीवनरेखा हैं और इन नदियों पर आसपास के गांवों की जल व्यवस्था निर्भर करती है। यदि इसी तरह अवैध खनन चलता रहा तो आने वाले समय में जल संकट गहरा सकता है।
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से नदी क्षेत्र में रात-दिन बजरी का दोहन किया जा रहा है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खनन माफिया के हौसले बुलंद हैं। कई ग्रामीणों ने जांच टीम को मौके पर नदी किनारों पर हुए कटाव और क्षति भी दिखाई। लोगों ने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अवैध खनन पर स्थायी रोक लगाई जाए।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित बजरी खनन से नदियों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होती है। इससे जल स्तर गिरने, मिट्टी कटाव बढ़ने और आसपास की जैव विविधता को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। खनन गतिविधियों से ग्रामीण इलाकों में भूजल संकट भी गहरा सकता है।
फिलहाल पूरे मामले में अब संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो संबंधित लीज धारकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब प्रशासन और एनजीटी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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