शाहपुराः हरित भारत और प्लास्टिक मुक्त भारत के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में नन्ही पर्यावरण सेविका श्रेया कुमावत की अनोखी पहल इन दिनों शाहपुरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से पहचानी जाने वाली श्रेया कुमावत द्वारा आयोजित “प्रकृति दर्शन” पर्यावरण जागरूकता प्रदर्शनी लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रही है। छोटी सी उम्र में श्रेया द्वारा किया जा रहा यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता जा रहा है।
प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराना और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से प्रकृति को बचाने के लिए प्रेरित करना है। प्रदर्शनी में लगाए गए मॉडल, पर्यावरण से जुड़े प्रयोग और नवाचार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। यहां आने वाले लोग न केवल इन मॉडलों को देख रहे हैं बल्कि पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझ रहे हैं।
अब तक इस प्रदर्शनी को देखने के लिए कई स्थानीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, आमजन और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे पहुंच चुके हैं। सभी ने श्रेया कुमावत के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायी पहल बताया है। लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में पर्यावरण के प्रति इतनी गंभीरता और समर्पण वास्तव में काबिल-ए-तारीफ है।
प्रदर्शनी के सातवें दिन शाहपुरा के अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रकाशचंद्र रेगर भी प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचे और उन्होंने पूरे उत्साह के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने श्रेया द्वारा तैयार किए गए विभिन्न मॉडलों को देखा और उनसे जुड़ी जानकारी भी प्राप्त की। श्रेया ने उन्हें जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया, सीड बॉल तैयार करने का तरीका, प्लास्टिक के पुनः उपयोग से बनाए गए नवाचारों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने अभियानों के बारे में विस्तार से बताया।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रकाशचंद्र रेगर ने श्रेया के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतनी छोटी उम्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार की सोच और प्रयास वास्तव में सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में बचपन से ही प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो जाए तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरण को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि श्रेया कुमावत के प्रयासों और कार्यों पर एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की जानी चाहिए और उसे व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाना चाहिए। इससे न केवल राजस्थान बल्कि देश के अन्य राज्यों के लोग भी प्रेरित होंगे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने के लिए आगे आएंगे।
इस अवसर पर उन्होंने श्रेया को आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखते हैं। “प्रकृति दर्शन” प्रदर्शनी इन दिनों क्षेत्र में पर्यावरण जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। इसके माध्यम से लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभाव, वृक्षारोपण की आवश्यकता, जैविक खाद के उपयोग और प्रकृति संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। यही कारण है कि यह पहल अब एक प्रेरक अभियान के रूप में उभर रही है, जो समाज को हरित और स्वच्छ भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दे रही है।
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