पीलीभीत में ग्राम प्रधान और सचिव पर घोटाले के आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से की जांच की मांग
खबर सार :-
पीलीभीत ज़िले में, ग्राम प्रधानों और सचिवों द्वारा की जा रही अनियमितताओं को लेकर ज़िलाधिकारी के पास रोज़ाना शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं; ग्रामीण उन पर विकास कार्यों के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगा रहे हैं।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः जिले में ग्राम प्रधान और सचिवों पर विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में विकास खंड पूरनपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर-1 उर्फ बानगंज के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में गांव में कोई ठोस विकास कार्य नहीं कराया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में कई योजनाओं को पूरा दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार स्ट्रीट लाइट, एलईडी बल्ब, नालियां, खड़ंजा और अन्य विकास कार्य सिर्फ कागजों में ही पूरे दर्शाए गए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया और विकास कार्यों के नाम पर निकाली गई रकम का आपस में बंदरबांट कर लिया। गांव के लोगों का कहना है कि जिन कार्यों के लिए बजट जारी हुआ, वे धरातल पर कहीं दिखाई नहीं देते। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह से मिले और लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की। ग्रामीणों ने शिकायत में कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
मामले की जांच का आश्वासन
जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। डीएम ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी और यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि ग्रामीणों के मन में अभी भी आशंका बनी हुई है। उनका कहना है कि अक्सर ऐसी शिकायतों में प्रभावशाली लोगों के दबाव में निष्पक्ष जांच नहीं हो पाती और कागजी औपचारिकताएं पूरी कर मामले को शांत कर दिया जाता है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधान के करीबी लोगों के बयान लेकर जांच रिपोर्ट को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस बार मामले को दबने नहीं देंगे और जरूरत पड़ने पर उच्च अधिकारियों तक भी शिकायत पहुंचाएंगे। गांव के लोगों की नजर अब जिलाधिकारी के आश्वासन और गठित जांच टीम की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो ग्राम पंचायत में हुए कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं प्रशासन की कार्रवाई यह तय करेगी कि ग्रामीणों को न्याय मिलता है या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।
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