प्राचीन भारतीय धातुशास्त्र के साक्ष्य आधारित अध्ययन पर जोर, डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने किया आह्वान

खबर सार :-
भारतीय इतिहास संकलन योजना और माधव सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में, शनिवार, 9 मई 2026 को केशव कुंज, झंडेवालान स्थित अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के 'ऑडिटोरियम' में "प्राचीन भारतीय धातु विज्ञान का पुनर्मूल्यांकन" विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

प्राचीन भारतीय धातुशास्त्र के साक्ष्य आधारित अध्ययन पर जोर, डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने किया आह्वान
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: केशवकुंज, झंडेवालान में 9 मई 2026 को भारतीय इतिहास संकलन योजना, दिल्ली प्रांत एवं माधव सेवा न्यास के संयुक्त तत्वावधान में “प्राचीन भारतीय धातु शास्त्र का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर मासिक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।

युवाओं को पुनर्जागरण का संदेश

कार्यक्रम के मार्गदर्शक एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को इतिहास के प्रति लोक जागरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना होगा, ताकि प्राचीन भारतीय धरोहर की मौलिक प्रासंगिकता को नए परिवेश में स्थापित किया जा सके। उन्होंने “विकसित भारत @2047” और वैश्विक नेतृत्व के लक्ष्य को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए युवाओं को अपनी परंपराओं के पुनर्जागरण का संदेश दिया।

कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण प्रमुख गोपाल आर्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा की पर्यावरणनुकूल अवधारणाओं को जीवनशैली में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाला।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर डाला प्रकाश

मुख्य वक्ता आचार्य रूबी मिश्रा, आचार्य रसायन शास्त्र विभाग एवं प्राचार्य, भगिनी निवेदिता कॉलेज ने अपने व्याख्यान में प्राचीन भारतीय धातुशास्त्र की समृद्ध परंपरा और उसके वैज्ञानिक साक्ष्यों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय धातु विज्ञान की उपलब्धियां आज भी वैश्विक स्तर पर अध्ययन का विषय हैं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. योगेश्वर मिश्रा ने वैदिक ग्रंथों और पौराणिक साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि शून्य (0) का आविष्कार भारतीय ज्ञान परंपरा की विश्व को अमूल्य देन है।

कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन समाजसेविका संध्या सिंह ने किया। मंच संचालन डॉ. रीना कपूर, सहायक प्राध्यापक, दयाल सिंह इवनिंग कॉलेज ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय सिंह, संगठन मंत्री, दिल्ली प्रांत द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर आचार्य अनुराग मिश्रा, अशोक कुमार, डॉ. सौरव मिश्रा, मुकेश उपाध्याय, डॉ. रमेश मिश्रा, डॉ. अस्मित शर्मा, आचार्य दुबे, डॉ. शिशिर कुमार मिश्रा, पीयूष मिश्रा, बमबम यादव, आशुतोष तिवारी, डॉ. सुधाकर कुमार मिश्रा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं विद्वान उपस्थित रहे।

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