सर्वपितृ अमावस्या पर गजछाया योग का शुभ संयोग, शिप्रा और नर्मदा घाटों पर तर्पण के लिए उमड़े श्रद्धालु

खबर सार :-

शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर नर्मदा व शिप्रा नदियों के घाटों पर श्राद्ध और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वहीं, उज्जैन के सिद्धवट घाट पर वाहनों का प्रवेश बंद रहा।
अमावस्या पर नर्मदा-शिप्रा घाटों पर उमड़ी भीड़, शनि मंदिर में लगीं कतारें

खबर विस्तार : -

भोपाल: शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के मौके पर मध्य प्रदेश में शिप्रा और नर्मदा नदियों के किनारे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। उज्जैन में शुभ 'गजछाया योग' समेत तीन खास खगोलीय संयोगों के बीच श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पूजा-अर्चना की। लोग पिछली रात से ही सिद्धवट घाट पर जुटने लगे थे। वहीं, त्रिवेणी स्थित शनि मंदिर में 'शनिश्चरी अमावस्या' के कारण दर्शन के लिए आधी रात से ही लंबी कतारें लग गईं। शुक्रवार रात से ही नर्मदापुरम के सेठानी घाट और नर्मदा नदी के अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व है। जो लोग पितृ पक्ष (पूर्वजों को समर्पित पखवाड़ा) के अन्य दिनों में ये अनुष्ठान नहीं कर पाते, वे इस दिन ये रस्में पूरी करते हैं। इस साल शनिवार, अमावस्या और गजछाया योग के दुर्लभ संयोग के कारण श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। धार्मिक परंपरा में, पूर्वजों से जुड़े अनुष्ठानों के लिए इस विशेष संयोग को अत्यंत शुभ माना जाता है।

सिद्धवट घाट पर ट्रैफिक पर रोक

उज्जैन के सिद्धवट घाट पर तर्पण और पूर्वजों की पूजा के लिए सुबह 5:00 बजे से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटने लगे थे। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस ने चार पहिया वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया। मंगलनाथ से भैरवगढ़ और भैरवगढ़ से सिद्धवट जाने वाले रास्तों पर ट्रैफिक रोक दिया गया ताकि घाट तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। पंडित बृजकुमार के अनुसार, श्राद्ध काल के दौरान कई तरह के ग्रहों और नक्षत्रों का संयोग बनता है। इस बार शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या गजछाया योग के साथ पड़ रही है, जिसे पूर्वजों की पूजा-अर्चना के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

त्रिवेणी शनि मंदिर में आधी रात से ही लगीं कतारें

शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर उज्जैन के त्रिवेणी शनि मंदिर में भक्त शुक्रवार रात से ही आने लगे थे। दर्शन के लिए आधी रात से ही कतारें लगनी शुरू हो गईं। मंदिर परिसर में भक्तों के लिए शिप्रा नदी के पानी से स्नान करने की व्यवस्था की गई थी; नदी में फव्वारे लगाए गए थे, हालांकि सुरक्षा कारणों से भक्तों को सीधे नदी में डुबकी लगाने की अनुमति नहीं थी। भक्तों ने पूजा करते समय भगवान शनि देव को तेल, काली उड़द की दाल, फूल और प्रसाद चढ़ाया। मंदिर में चढ़ाए गए तेल की 24 घंटे बाद नीलामी की जाएगी और नीलामी से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा।

जूते-चप्पल और कपड़ों को रीसायकल करने की पहल

उज्जैन में धार्मिक आयोजनों के दौरान घाटों पर छोड़े गए जूते-चप्पल और कपड़ों को इकट्ठा करके रीसायकल करने की व्यवस्था की गई है। इन चीजों से फ़ाइल कवर और तेल जैसे उत्पाद बनाए जाएंगे। इसका मकसद घाटों पर साफ़-सफ़ाई बनाए रखना और इकट्ठा की गई चीजों का दोबारा इस्तेमाल करना है।

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सुबह 4 बजे शुरू हुआ पवित्र स्नान

भूतड़ी अमावस्या के मौके पर नर्मदापुरम में नर्मदा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सेठानी घाट और दूसरी जगहों पर शुक्रवार रात से ही पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और जागरण शुरू हो गए थे। शनिवार सुबह 4 बजे पवित्र स्नान शुरू हुआ। श्रद्धालु न सिर्फ़ नर्मदापुरम से, बल्कि हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा, भोपाल, नागपुर, देवास, शाजापुर, विदिशा, महू और आस-पास के इलाकों से भी आए थे। शुक्रवार आधी रात के आसपास सेठानी घाट पर इतनी भीड़ हो गई कि लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया। पवित्र डुबकी लगाने के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने तर्पण (पूर्वजों को दी जाने वाली भेंट) और दान-पुण्य भी किया। जबलपुर और डिंडोरी इलाकों में भी नर्मदा घाटों, जैसे कि आंवली घाट पर काफ़ी भीड़ देखी गई। चौदस की रात को श्रद्धालु अपने परिवार के सदस्यों और पड़िहारों (पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले) के साथ घाटों पर अपने कुलदेवी-देवताओं की पूजा करने के लिए बैठे। महिलाओं के समूहों ने भजन गाए और श्रद्धालु ढोलक और मंजीरे की थाप पर जागरण में शामिल हुए। पंडित देवेंद्र दुबे के अनुसार, 'भूतड़ी अमावस्या' पर नर्मदा नदी में स्नान करने, दान-पुण्य करने और पूर्वजों के लिए 'तर्पण' (धार्मिक अनुष्ठान) करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले अनुष्ठान शांति, समृद्धि और पूर्वजों की प्रसन्नता से जुड़े होते हैं।

कई जगहों पर 150 से ज्यादा कर्मचारी तैनात

नर्मदापुरम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, राजस्व विभाग और होम गार्ड के 150 से ज्यादा कर्मचारियों को सेठानी, पर्यटन, कोरी, विवेकानंद और बांद्राभान घाटों सहित कई जगहों पर तैनात किया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट सीमा बडोले के अनुसार, सुरक्षा बलों की तैनाती सुबह 3:00 बजे से ही शुरू कर दी गई थी। श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए लगातार घोषणाएं की जा रही थीं। हालांकि, रात करीब 12:30 बजे बिजली गुल होने से सेठानी घाट पर अंधेरा छा गया, जिससे भारी भीड़ के बीच रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया।

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