राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर निवाड़ी में भव्य आयोजन, निकली शोभायात्रा

खबर सार :-

निवाड़ी में राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर गहोई वैश्य समाज ने भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह और सामूहिक भोज का आयोजन किया। कार्यक्रम में झांसी सहित कई जिलों के गणमान्य लोग शामिल हुए।
राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती पर निवाड़ी में भव्य आयोजन

खबर विस्तार : -

झांसीः राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त की 140वीं जयंती के अवसर पर मध्य प्रदेश के निवाड़ी में गहोई वैश्य समाज द्वारा भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशाल शोभायात्रा निकाली गई, वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया गया और राष्ट्रकवि के साहित्यिक एवं राष्ट्रीय योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।

बाइक रैली और भव्य शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम की शुरुआत निवाड़ी तिगैला से सैकड़ों युवाओं और समाजजनों की बाइक रैली के साथ हुई। इसके बाद गहोई धर्मशाला से डीजे, सुसज्जित बग्गी और घोड़ों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा खंदिया वाले श्री हनुमान मंदिर तक पहुंची और वहां से नगर के प्रमुख बाजारों से गुजरते हुए राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त के जयघोष के बीच कार्यक्रम स्थल पर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग और स्थानीय नागरिक शामिल रहे।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त, भगवान लखनलाल एवं मां सरस्वती के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रकवि के साहित्यिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गहोई वैश्य समाज की ओर से 75 वर्ष से अधिक आयु के 34 वरिष्ठजनों को शॉल, श्रीफल और भगवान लखनलाल का चित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। समाज के वरिष्ठ सदस्यों के सम्मान के दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।

डॉ. संदीप सरावगी ने संगठन की शक्ति पर दिया जोर

समारोह के मुख्य अतिथि संघर्ष सेवा समिति, झांसी के अध्यक्ष डॉ. संदीप सरावगी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त को महान क्रांतिकारी, श्रेष्ठ चिंतक और उत्कृष्ट भाषाविद बताते हुए उनके साहित्य को राष्ट्र जागरण का माध्यम बताया। उन्होंने समाज से संगठित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि संगठन में ही शक्ति निहित है और एकजुट समाज को कोई भी शक्ति झुका नहीं सकती। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि गहोई वैश्य महासभा के उपाध्यक्ष मोहन बड़कुल (बामौर) ने राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त के जीवन, साहित्य और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि की रचनाएं आज भी समाज को राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।

अध्यक्ष ने जताया सभी का आभार

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गहोई वैश्य समाज, निवाड़ी के अध्यक्ष शंकरलाल बडोनिया ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समाज के सभी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार शिव कुमार गुप्त 'मामा' ने किया। उनके प्रभावशाली संचालन और कविता पाठ की उपस्थित लोगों ने खूब सराहना की। इस अवसर पर श्रीमती निरंजन जैन (अध्यक्ष, जनपद पंचायत), श्रीमती आकांक्षा गुप्ता (जिला शिक्षा अधिकारी, पन्ना), अरविंद रेजा, सुरेश कठिल, जयप्रकाश नौगरैया, रजुल शेखर सहित कई वक्ताओं ने राष्ट्रकवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार रखे।

सामूहिक भोज के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम को सफल बनाने में संतोष धूसर, राजेंद्र खरया, दीपू नगरिया, सुधीर धूसर, सौरभ इटौंदिया, पुरुषोत्तम धूसर, पुष्कर तथा आयोजन समिति के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समारोह का समापन गहोई वैश्य समाज द्वारा आयोजित सामूहिक भोज के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग अपने परिवार सहित शामिल हुए। पूरे आयोजन में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रकवि डॉ. मैथिलीशरण गुप्त के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संदेश प्रमुख रूप से देखने को मिला।

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