हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका, बड़गाईं जमीन मामले में आरोप गठन का रास्ता साफ

खबर सार :-

बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से झटका लगा है। डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद आरोप गठन का रास्ता साफ हो गया है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ा झटका

खबर विस्तार : -

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की ओर से उनकी डिस्चार्ज पिटीशन खारिज किए जाने के आदेश को बरकरार रखते हुए हेमंत सोरेन की हस्तक्षेप याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद मामले में निचली अदालत के स्तर पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

 हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख पहले से निर्धारित है। इस दौरान हेमंत सोरेन की अदालत में उपस्थिति अपेक्षित है। हेमंत सोरेन ने विशेष पीएमएलए अदालत के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी गई थी। उनका पक्ष रहा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। बचाव पक्ष ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से पेश किए गए कुछ बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता तथा उनके आधार पर आगे मुकदमा चलाने पर भी सवाल उठाए थे।

8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला

मामला रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय इस जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। ईडी का आरोप है कि जमीन से जुड़े लेनदेन में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और अन्य प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया गया। वहीं, हेमंत सोरेन की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। डिस्चार्ज याचिका में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं।

ईडी ने क्या दलील दी?

ईडी ने अदालत के समक्ष कहा था कि जांच के दौरान सामने आए दस्तावेज, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रथम दृष्टया मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं। जांच एजेंसी का तर्क था कि डिस्चार्ज के स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। साक्ष्यों की विश्वसनीयता और उनके प्रभाव का विस्तृत परीक्षण मुकदमे के दौरान किया जाना है। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून को हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को प्रथम दृष्टया मामला बनाने के लिए पर्याप्त माना था। हालांकि, निचली अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस स्तर पर आरोपी की दोषसिद्धि तय नहीं की जा रही है।

कई अन्य आरोपियों पर आरोप तय

इस मामले में विशेष पीएमएलए अदालत पहले ही अंतू तिर्की, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित कर चुकी है। ईडी की ओर से हेमंत सोरेन समेत करीब 18 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। अब हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद हेमंत सोरेन के खिलाफ भी आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हालांकि, आरोप गठन का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

19 सितंबर की सुनवाई पर नजर

अब इस मामले में अगली अहम तारीख 19 सितंबर है। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान आगे की प्रक्रिया तय होने की संभावना है। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की कार्रवाई किस चरण तक पहुंचती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। बड़गाईं जमीन मामले की कानूनी कार्यवाही का असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामला निचली अदालत में आगे बढ़ने की स्थिति में है और 19 सितंबर की सुनवाई इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।

यह भी पढ़ेंः-चुनाव आयोग ने ममता और ऋतब्रत गुट को नए नाम व चिह्न दिए, उपचुनाव में होंगे इस्तेमाल

अन्य प्रमुख खबरें