कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग की बदहाली से ग्रामीण परेशान, शिकायतों के बावजूद समाधान का इंतजार

खबर सार :-

कोटखावदा क्षेत्र के कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग पर मिट्टी डालने के बाद ग्रेवल या मोरम नहीं डालने से बारिश में रास्ता कीचड़ में बदल गया। ग्रामीणों ने तत्काल सड़क दुरुस्त कराने की मांग की।
कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग बदहाल, बारिश में कीचड़ से ग्रामीण परेशान

खबर विस्तार : -

कोटखावदा: बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों और आम रास्तों की बदहाली एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। कोटखावदा क्षेत्र में कंवरपुरा से काली तलाई को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की मौजूदा स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग को लेकर पंचायत से लेकर उपखंड स्तर के अधिकारियों तक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत बडोदिया की ओर से कुछ समय पहले मार्ग पर मिट्टी डाली गई थी। मिट्टी डालने के बाद रास्ते को मजबूत करने के लिए आवश्यक ग्रेवल या मोरम नहीं डाली गई। अब बारिश होने के बाद यही मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो गई है। कई स्थानों पर पानी और कीचड़ जमा होने से मार्ग पर आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस काम का उद्देश्य रास्ते को बेहतर बनाना था, वह अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण बरसात में लोगों की परेशानी और बढ़ गई।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि रास्ते पर विकास कार्य के तहत मिट्टी डाली गई थी तो उसे अंतिम रूप देने के लिए ग्रेवल या मोरम क्यों नहीं डाली गई? ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी कच्चे रास्ते पर केवल मिट्टी डाल देना पर्याप्त नहीं होता। विशेषकर बरसात से पहले रास्ते को इस तरह तैयार किया जाना जरूरी है कि पानी और कीचड़ के कारण आवागमन बाधित न हो। ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या संबंधित स्तर के अधिकारियों ने कार्य पूरा होने के बाद मौके का निरीक्षण किया था? यदि निरीक्षण किया गया था तो बरसात शुरू होने के बाद रास्ते की यह स्थिति सामने क्यों आई? लोगों का कहना है कि मिट्टी डालने के बाद यदि समय रहते ग्रेवल या मोरम डाल दी जाती तो रास्ते की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। फिलहाल कई हिस्सों में फिसलन और कीचड़ के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है।

तीन गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है मार्ग

कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग किसी एक गांव के लोगों के आवागमन तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार कंवरपुरा, बाढ़ मुरलीपुरा और कुशालपुरा सहित आसपास के गांवों के लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। रास्ते की बदहाल स्थिति का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों, किसानों, मजदूरों और अन्य ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। बरसात के दौरान दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। कीचड़ और फिसलन के कारण वाहन के फिसलने की आशंका बनी रहती है। वहीं किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने या आपात स्थिति में वाहन निकालने के दौरान भी ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। 

अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल

मार्ग की स्थिति को लेकर अब पंचायत प्रशासन के साथ-साथ उपखंड स्तर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किसी सार्वजनिक रास्ते पर काम होने के बाद उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करना संबंधित विभाग और अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या कार्य के बाद मौके पर निरीक्षण किया गया था और क्या यह देखा गया कि बारिश के बाद रास्ता ग्रामीणों के लिए उपयोगी रहेगा या नहीं। ग्रामीणों के मुताबिक यदि निरीक्षण किया गया था तो रास्ते की मौजूदा स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं यदि निरीक्षण नहीं किया गया तो यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। हालांकि इस मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में ग्रामीणों की शिकायतों और आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीणों ने मांगी सक्रिय पहल

रास्ते की बदहाली को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने और विकास कार्यों की निगरानी में जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब तीन गांवों के लोगों से जुड़ा महत्वपूर्ण मार्ग बरसात में बदहाल स्थिति में पहुंच गया है, तो अब तक इसकी प्रभावी सुध क्यों नहीं ली गई—यह सवाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि मौके की वास्तविक स्थिति को देखते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाएं।

 ग्रेवल या मोरम डालकर रास्ता तत्काल दुरुस्त कराने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग का तत्काल निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि रास्ते पर आवश्यकतानुसार ग्रेवल या मोरम डलवाकर उसे मजबूत किया जाए, ताकि बरसात के दौरान आवागमन सुचारू रह सके। ग्रामीणों के अनुसार बारिश का मौसम अभी जारी है और यदि समय रहते रास्ते की मरम्मत नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। पानी और कीचड़ के कारण रास्ते का और अधिक हिस्सा खराब होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले को केवल शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि तीन गांवों के लोगों की रोजमर्रा की सुविधा और आपातकालीन आवागमन से जुड़े मुद्दे के रूप में देखना चाहिए।

कब होगा स्थायी समाधान?

कंवरपुरा-काली तलाई मार्ग की मौजूदा स्थिति ग्रामीण इलाकों में सड़क और संपर्क मार्गों के रखरखाव को लेकर कई सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्य केवल कागजों या मौके पर मिट्टी डालने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका लाभ जमीन पर दिखाई देना चाहिए। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या उपखंड प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेगा? क्या पंचायत प्रशासन रास्ते की तत्काल मरम्मत करवाएगा? क्या स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या सुनेंगे?

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