निजी अस्पतालों को फायर सेफ्टी पर डीएम की सख्त चेतावनी, नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
खबर सार :-
जिलाधिकारी ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी को जिले के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का विशेष फायर सेफ्टी निरीक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए। बैठक में आईएमए, नीमा सहित 70 से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालक, चिकित्सक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
खबर विस्तार : -
झांसीः जिलाधिकारी गौरांग राठी ने जनपद के सभी निजी नर्सिंग होम, अस्पताल और क्लीनिक संचालकों को फायर सेफ्टी मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि झांसी आसपास के जिलों के लिए एक प्रमुख मेडिकल हब है, इसलिए यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। फायर सेफ्टी के नियमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फायर एनओसी अनिवार्य
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि 50 बेड या उससे अधिक क्षमता वाले सभी अस्पतालों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक मंजिल पर आईएसआई मार्क वाले फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, हूटर तथा स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। साथ ही सभी आपातकालीन निकास द्वार हमेशा खुले रहें और उन पर स्पष्ट दिशा-सूचक संकेतक भी लगाए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में विद्युत लोड के अनुरूप वायरिंग की नियमित जांच कराई जाए तथा डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को समय-समय पर फायर मॉक ड्रिल का प्रशिक्षण दिया जाए। इसके अलावा मरीजों को आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी हर संस्थान में सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को निर्देशित किया कि बिना वैध फायर एनओसी के कोई भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम संचालित न होने पाए। ऐसे संस्थानों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नियमित जांच के निर्देश
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) पल्लवी मिश्रा ने कहा कि अस्पतालों के बेसमेंट का उपयोग मरीजों के वार्ड के रूप में किसी भी स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए। बेसमेंट केवल पार्किंग अथवा स्टोर के रूप में ही इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने सभी अस्पताल संचालकों को कम से कम दो आपातकालीन निकास द्वार, फायर सेफ्टी प्लान, भवन का स्वीकृत नक्शा, विद्युत लोड प्रमाण-पत्र तथा वार्षिक फायर ऑडिट रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा कराने के निर्देश दिए।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी आर.के. राय ने आईसीयू, एनआईसीयू और ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अलग प्रवेश और निकास व्यवस्था रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर किसी भी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए। साथ ही हर छह माह में विद्युत वायरिंग की जांच कराई जाए, यूपीएस और जनरेटर के लिए अलग फायर-प्रूफ कक्ष बनाया जाए तथा सभी डॉक्टरों, नर्सों और वार्ड बॉय को फायर एक्सटिंग्विशर के संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। प्रत्येक वार्ड में इवैक्यूएशन प्लान भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
जिलाधिकारी गौरांग राठी ने चेतावनी देते हुए कहा कि फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों और नर्सिंग होम के खिलाफ उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम-2022 के तहत 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, पंजीकरण निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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