रमेश ईनाणी मर्डर केस में पुलिस को बड़ी सफलता, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
खबर सार :-
चित्तौड़गढ़ के हाई-प्रोफाइल रमेश इनानी हत्याकांड में रविवार को आखिरकार पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली। मुख्य आरोपी रामता राम जो पिछले लगभग छह महीनों से पुलिस से बचते हुए फरार चल रहा था अब सलाखों के पीछे है।
खबर विस्तार : -
चित्तौड़गढ़ः बहुचर्चित रमेश ईनाणी हत्याकांड में आखिरकार पुलिस को बड़ी सफलता मिल गई है। करीब छह महीने से फरार चल रहे मुख्य आरोपी रामता राम को कोतवाली थाना पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पूरे जिले में सनसनी फैलाने वाले इस मामले में रमता राम को हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस को इस केस से जुड़े कई अहम खुलासों की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला
यह हत्याकांड 11 नवंबर 2025 को हुआ था। कृष्णा नगर निवासी भाजपा नेता और कुरियर कारोबारी रमेश चंद्र ईनानी रोज की तरह अपनी स्कूटी से दुकान के लिए निकले थे। जब वे सिटी पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, तभी पीछे से बाइक पर आए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल ईनाणी को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उदयर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने पूरे चित्तौड़गढ़ को झकझोर कर रख दिया था। घटना के बाद व्यापारियों, भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। शहर में कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस प्रशासन पर आरोपियों को जल्द पकड़ने का दबाव बढ़ने लगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित कर जांच तेज कर दी थी।
जांच के दौरान सबसे पहले पुलिस ने वारणसी निवासी शूटर मनीष कुमार उर्फ कमल दुबे को गिरफ्तार किया। इसके बाद सिरोही निवासी भजनराम और मिर्जापुर निवासी अरविंद उर्फ कृपानाथ दुबे को भी हिरासत में लिया गया। इन गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट हो गया कि हत्या कोई अचानक हुई वारदात नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के तहत रची गई साजिश थी।
जांच में सामने आया जमीनी विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि रमता राम और रमेश ईनाणी के बीच करीब 30 साल पुराना जमीन विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते हत्या की साजिश रची गई। पुलिस के अनुसार रमता राम ने सुपारी देकर इस वारदात को अंजाम दिलवाया और घटना के बाद लगातार फरार चल रहा था। वह कई महीनों तक पुलिस को चकमा देता रहा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में गौरव श्रीवास्तव ने इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया। पुलिस की तकनीकी निगरानी, लगातार छापेमारी और मुखबिर तंत्र की मदद से आखिरकार रविवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि आरोपी रमता राम पहले रामस्नेही संप्रदाय से जुड़ा संत रह चुका है। हत्या के मामले में नाम सामने आने के बाद उसे संप्रदाय से निष्कासित कर दिया गया था। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे गहन पूछताछ कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में हत्या की साजिश, फंडिंग और अन्य सहयोगियों को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे जिले की नजर अब पुलिस जांच और आगे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हुई है।
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