विश्वकर्मा जयंती पर जानें देश के प्रमुख मंदिरों के बारे में, जहां होती है विश्वशिल्पी की पूजा
खबर सार :-
देवताओं के शिल्पकार और निर्माण के जनक भगवान विश्वकर्मा की जयंती 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इस अवसर पर आइए जानते हैं देश के प्रमुख विश्वकर्मा मंदिरों के बारे में-
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: गुरुवार को पूरे देश में भगवान विश्वकर्मा की जयंती बहुत उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस मौके के लिए तैयारियां पहले से ही चल रही हैं। इस दिन फैक्ट्रियों, ऑफिसों और घरों में मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा की जाती है। भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है। देशभर में उनके कई मंदिर हैं और इस खास दिन पर बड़ी संख्या में भक्त पूजा करने के लिए वहां जाते हैं।
भगवान विश्वकर्मा के प्रसिद्ध मंदिर भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थित हैं। इनमें सबसे प्रमुख मंदिर असम के गुवाहाटी में है, जिसे दुनिया का सबसे पुराना विश्वकर्मा मंदिर माना जाता है। यह मां कामाख्या देवी मंदिर परिसर के नीचे स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 1965 में कामाख्या मंदिर के पुजारियों ने महावीर प्रसाद की मदद से करवाया था। हर साल 17 सितंबर को बड़ी संख्या में भक्त भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए इस मंदिर में आते हैं। यह दिन देश के पूर्वी राज्यों में बहुत जोश के साथ मनाया जाता है।
पंजाब में बना शानदार मंदिर
पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा (बंगा रोड, गोन्सपुर) में सफेद संगमरमर से बना एक शानदार और विशाल मंदिर है। 'सर्वशक्तिमान विश्वकर्मा मंदिर' के नाम से मशहूर इस मंदिर का निर्माण 1909 में पंडित नत्थू राम धीमान मंधाली-वाले ने शुरू करवाया था। कपूरथला के महाराजा ने मंदिर के लिए जमीन दान की थी और 1911 में इस पवित्र स्थल पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी। न केवल पंजाब से बल्कि देश-विदेश से भी कारीगर, इंजीनियर और शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए इस मंदिर में आते हैं।
दिल्ली में पांडवों ने रखी थी मंदिर की नींव
भगवान विश्वकर्मा के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में स्थित है। माना जाता है कि इस मंदिर की नींव पांडवों ने रखी थी। महाभारत काल में, जब युधिष्ठिर के कहने पर इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया गया था, तब इस जगह का इस्तेमाल माया दानव (जिन्हें विश्वकर्मा का पुत्र माना जाता है) ने निर्माण कार्यों के लिए किया था। मंदिर परिसर में एक बहुत पुराना और गहरा कुआं है, जिसका पानी आज भी इस्तेमाल किया जाता है। यहां एक पुराना पीपल का पेड़ भी है। विश्वकर्मा जयंती के मौके पर मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त इकट्ठा होते हैं।
ये भी पढ़ें:- प्रगति का प्रतीक है विश्वकर्मा पूजा, 17 सितंबर का दिन है शुभ
राजस्थान में पांच दिव्य रूपों के दर्शन
पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर राजस्थान के जोधपुर के डांगियावास इलाके में स्थित है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड के आदि गुरु, दिव्य वास्तुकार और सृष्टिकर्ता के रूप में पूजा जाता है। 'पंचमुखी' (पांच मुख वाले) नाम उनके पांच दिव्य रूपों और मुखों को दर्शाता है, जो सृजन, कला और निर्माण के विभिन्न आयामों का प्रतीक हैं। भक्त यहां भगवान विश्वकर्मा को कड़ी मेहनत, ईमानदारी और कारीगरी की प्रेरणा का स्रोत मानते हुए उनकी पूजा करते हैं, ताकि वे अपने-अपने पेशों में तरक्की और सफलता पा सकें।
मुंबई में विश्वकर्मा मंदिर श्रद्धा का केंद्र
मुंबई के कांदिवली ईस्ट (हनुमान नगर, शिवाजी नगर रोड) में स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर स्थानीय निवासियों, कारीगरों और शिल्पकारों के लिए गहरी आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। मुंबई में किराए के मकानों में रहने वाले लोग अक्सर अपना घर खरीदने या बनाने के लिए प्रार्थना करने इस मंदिर में आते हैं। इसके अलावा, स्थानीय कारीगर, लोहार, बढ़ई, इंजीनियर और वे लोग जो अपनी कला और औजारों से अपनी आजीविका कमाते हैं, विशेष रूप से आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।
मध्य प्रदेश में दो बार मनाई जाती है जयंती
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक अनोखा मंदिर स्थित है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान विश्वकर्मा की जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा माघ महीने की त्रयोदशी (तेरहवें दिन) को प्रकट हुए थे; इसलिए, समुदाय इस दिन एक विशेष उत्सव मनाता है। साथ ही, मध्य प्रदेश के सागर जिले के सदर इलाके में भी भगवान विश्वकर्मा का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
FAQ
1. विश्वकर्मा जयंती कब मनाई जाएगी?
विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2026 मनाई जाएगी।
2. भगवान विश्वकर्मा का सबसे प्राचीन मंदिर कहां स्थित है?
असम के गुवाहाटी में भगवान विश्वकर्मा के मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है।
3. पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर कहां स्थित है?
पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर राजस्थान के जोधपुर के डांगियावास इलाके में स्थित है।
ये भी पढ़ें:- मध्य प्रदेश के जंगल में विराजमान हैं गजानन, नर्मदा दर्शन से पहले धरहर गणेश मंदिर में मत्था टेकते हैं श्रद्धालु
अन्य प्रमुख खबरें
-
Panchang 31 October 2026: शनिवार 31 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-30
-
Aaj Ka Rashifal 31 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-30
-
Panchang 30 October 2026: शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-29
-
Aaj Ka Rashifal 30 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-29
-
करवा चौथ के दिन भूलकर भी महिलाएं न करें ये काम
2026-10-29
-
Karwa Chauth 2026: पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनें रखेंगी निर्जला उपवास
2026-10-28
-
Panchang 29 October 2026: गुरुवार 29 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-28
-
Aaj Ka Rashifal 29 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-28
-
Panchang 28 October 2026: बुधवार 28 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-27
-
Aaj Ka Rashifal 28 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-27
-
Panchang 27 October 2026: मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-26
-
Aaj Ka Rashifal 27 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-26
-
Panchang 26 October 2026: सोमवार 26 अक्टूबर 2026 का पंचांग
2026-10-25
-
Aaj Ka Rashifal 26 October 2026 : इन राशियों को आज होगा आर्थिक लाभ
2026-10-25
-
Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत
2026-10-25