जानें कब है विश्वकर्मा पूजा? तारीख से लेकर शुभ मुहूर्त और पूजा का विधि विधान

खबर सार :-

भगवान विश्वकर्मा की पूजा इस बार 17 सितंबर को होगी। यह दिन काफी फलदायी है। प्रगति के प्रतीक के रूप में विधि विधान से इन दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करनी चाहिए।
प्रगति का प्रतीक है विश्वकर्मा पूजा, 17 सितंबर का दिन है शुभ

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और दिव्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। सनातन में किसी भी प्रकार का निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी कौशल के क्षेत्र में हर साल भगवान विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व होता है। जिस दिन विश्वकर्मा की पूजा होती है, कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा हमेशा से की जाती है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि सफलता, तरक्की और समृद्धि का द्वार भगवान विश्वकर्मा की पूजा से खुलता है। 

17 सितंबर गुरुवार का दिन है श्रेष्ठ

वह कोई भी हो, यदि इनकी पूजा के संबंध में तनिक भी असमंजस बना है तो यह जान लें कि विश्वकर्मा पूजा कल है या परसों? 2026 के विश्वकर्मा पूजा के लिए 17 सितंबर गुरुवार का दिन श्रेष्ठ माना गया है। विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इसके संबंध में कहा गया है कि यह पर्व कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। भगवान की पूजा का समय भी निश्चित होता है। कभी भी पूजा शुरू कर देना फलदायी नहीं होता है। विश्वकर्मा पूजा के लिए सुबह 7ः58 से दोपहर 12ः40 बजे तक का समय शुभ माना गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11ः51 बजे से दोपहर 12ः40 बजे तक का होगा।

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प्रगति का प्रतीक है विश्वकर्मा पूजा

माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य निर्माणकर्ता के रूप में वर्णित किया गया है। धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि उन्हें शिल्प, निर्माण और वास्तुकला का अधिष्ठाता देव माना जाता है। इसीलिए पूजा के समय लोग भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर के साथ पास में उपकरण आदि वस्तु रखते हैं। यह वह वस्तुएं होती हैं, जो उनके काम आती हैैं। भगवान के साथ इनकी भी पूजा की जाती है।

वह किसी भी स्थान, फैक्ट्री में लगी मशीन हो, दुकान के उपकरण हों, वर्कशॉप के औजार हों या वाहन, इनको साफ करने के बाद ही पूजा में शामिल किया जाता है। कामकाजी लोग यह पर्व मेहनत, हुनर और काम के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में इसको मनाते हैं। पूजा करने वाली परंपरा में पूजा के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनना जरूरी होता है। वैसे तो सनातन में किसी भी पूजा में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। 

उपकरणों की सफाई कर पूजास्थल पर रखें

पूजा स्थल और कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करने के बाद मशीनों, औजारों और अन्य उपकरणों को भी साफ कर लिया जाता है। जब इतना काम कर लिया जाए, तब एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करना चाहिए। पूजा करते समय एक दीपक जला लें। विश्वकर्मा भगवान को रोली, अक्षत, चंदन, फूल, माला, फल, मिठाई और नैवेद्य अर्पित कर देना पूजा का शुद्ध और श्रेष्ठ तरीका है। इसी दौरान गंगाजल से पूजा स्थल का शुद्धिकरण किया जाना चाहिए।

पूजा में शुद्धीकरण के लिए गंगाजल रखें

गंगाजल हमारे यहां पूज्य माना जाता है। हर पूजा में शुद्धीकरण इसी जल से होता है। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें। औजारों और मशीनों पर भी रोली-अक्षत लगाकर फूल चढ़ाएं। जब यह कार्य पूरा कर लें, भगवान की आरती से पहले भोग लगाएं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार हवन भी करें। वातावरण पूरा विश्वकर्मा मय हो जाएगा। इसके साथ ही प्रसाद वितरण करें और अगले साल तक फिर इस दिन का इंतजार करें।

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