Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को आसमान में दिखेगा दुर्लभ नजारा, इन राशियों पर पड़ेगा सूर्य ग्रहण का दुष्प्रभाव
खबर सार :-
Surya Grahan 2026 : साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लग रहा है। यह सूर्य ग्रहण स्पेन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां 100 साल बाद दुर्लभ नजारा दिखेगा।
खबर विस्तार : -
Surya Grahan 2026: दुनिया में 12 अगस्त, 2026 को एक बहुत ही दुर्लभ खगोलीय घटना आसमान में दिलाई देगी। इस दिन सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेगा, जिससे दिन में अंधेरा छा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सदी की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में से एक होगी। इसका असर आपके पारिवारिक जीवन, मानसिक संतुलन और पेशेवर मोर्चे पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा इसका दुष्प्रभाव कई राशियों पर भी पड़ेगा।
100 साल बाद दिखेगा दुर्लभ नजारा
12 अगस्त को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण स्पेन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग एक सदी बाद देश के उत्तरी हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। इसलिए, बड़ी संख्या में पर्यटक और खगोल विज्ञान के शौकीन इस क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाएगा और सूर्य की बाहरी परत कोरोना साफ तौर पर दिखाई देगी।
किन देशों में दिखाई देगा अद्भुत नजारा
पूर्ण सूर्य ग्रहण का रास्ता हज़ारों किलोमीटर तक फैला होगा। अटलांटिक महासागर से शुरू होकर, यह दक्षिणी स्पेन, जिब्राल्टर, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, मिस्र, सूडान, सऊदी अरब, यमन और सोमालिया से होकर गुजरेगा। इनमें से, मिस्र को ग्रहण देखने के लिए सबसे अच्छी जगह माना जा रहा है। लक्सर और न्यू वैली गवर्नरेट के आसपास के इलाकों में सबसे लंबे समय तक अंधेरा रहेगा। इसके अलावा, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के लाखों लोग कम से कम आंशिक सूर्य ग्रहण देख पाएंगे।
क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा
12 अगस्त, 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए, देश के लोग इस खगोलीय घटना को सीधे नहीं देख पाएंगे। हालांकि, जिन देशों में ग्रहण दिखाई देगा, वहां से लाइव प्रसारण और तस्वीरें देखने के लिए उपलब्ध होंगी। अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा है, तो इसे कभी भी नंगी आंखों से न देखें। ग्रहण देखने के लिए केवल सर्टिफाइड सोलर व्यूइंग ग्लास या खास सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करें। आम धूप का चश्मा आँखों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता है।
सूर्य ग्रहण की तारीख और सूतक काल
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को रात 11:17 बजे से 13 अगस्त सुबह 04:25 बजे तक। ऐसे में सावन अमावस्या 12 अगस्त को है, तो साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। वैसे तो सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसके आधार पर, सूतक काल सुबह 09:04 बजे शुरू होना चाहिए। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए वहां सूतक काल लागू नहीं होगा।
वैज्ञानिकों के लिए खास होगा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण के दौरान सूर्य के कोरोना, पृथ्वी के वायुमंडल और अचानक छाने वाले अंधेरे के प्रभावों पर कई तरह के अध्ययन किए जाएंगे। दुनिया भर के कई वैज्ञानिक संगठन इस खगोलीय घटना के लिए खास तैयारियां कर रहे हैं।
इन राशियों पर पड़ेगा ग्रहण का दुष्प्रभाव
सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा यानी इस पर सूतक काल लागू नहीं होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन चार खास राशियों के लोगों को इस ग्रहण को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। सूर्य ग्रहण का मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के लोगों पर बुरा असर पड़ सकता है। इन लोगों को 12 अगस्त से 12 जनवरी तक सतर्क रहना चाहिए। उन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान और आर्थिक संपत्ति को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। आपको आर्थिक नुकसान, संपत्ति से जुड़े विवाद, बीमारी, मान-सम्मान में कमी और तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के लिए करें ये उपाय
इन चार राशियों के लोगों को 12 अगस्त से शुरू करके छह महीने तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक करें। भगवान शिव की कृपा से सभी ग्रहों की परेशानियां, दोष और संकट दूर हो जाएंगे।
FAQ
1. 12 अगस्त 2026 को कौन सा ग्रहण लग रहा है?
12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण लग रहा है।
2. कितने बजे से लगेगा सूर्य ग्रहण ?
यह 12 अगस्त की रात रात 11:17 शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।
3. क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं, यह भारत में नजर नहीं आएगा क्योंकि तब यहां रात होगी।
4. सूर्य ग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा?
12 अगस्त 2026 लगने वाला सूर्य ग्रहण यह ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और आर्कटिक क्षेत्र में दिखाई देगा।
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