नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने खड़गे से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने इस बयान को आचार संहिता के संभावित उल्लंघन के रूप में देखा है। आचार संहिता के तहत राजनीतिक दलों और नेताओं को चुनावी अवधि के दौरान मर्यादित भाषा का प्रयोग करने और व्यक्तिगत या भड़काऊ टिप्पणियों से बचने का निर्देश होता है। आयोग का मानना है कि इस प्रकार की भाषा चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को ठेस पहुंचाती है।
यह मामला उस समय सामने आया जब भारतीय जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और खड़गे के बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू, निर्मला सीतारमण, अर्जुन राम मेघवाल और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अर्जुन सिंह शामिल थे। उन्होंने आयोग से इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने और भविष्य के लिए उदाहरण स्थापित करने की मांग की।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न केवल अनुचित है, बल्कि पूरे देश का अपमान भी है। उन्होंने इसे “जहरीली राजनीति” का उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विवाद की शुरुआत मंगलवार को चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई, जहां खड़गे ने एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री के संदर्भ में “आतंकवादी” शब्द का उपयोग किया था। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने तेजी से तूल पकड़ लिया।
हालांकि, बाद में खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को आतंकवादी कहना नहीं था, बल्कि वे देश में कथित रूप से बनाए जा रहे “डर के माहौल” की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ संस्थाओं और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल लोगों को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना और अस्वीकार्य करार दिया है। पार्टी ने खड़गे से सार्वजनिक माफी की मांग की है और कहा है कि इस तरह की भाषा राजनीतिक संवाद के स्तर को गिराती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी राजनीति में भाषा और मर्यादा के स्तर पर व्यापक बहस को जन्म देता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खड़गे आयोग के नोटिस का क्या जवाब देते हैं और चुनाव आयोग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।
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