शहजाद भट्टी नेटवर्क पर यूपी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 52 आरोपी गिरफ्तार, 12 मुकदमे दर्ज
खबर सार :-
उत्तर प्रदेश पुलिस ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 52 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 12 मुकदमे दर्ज किए। जांच में सोशल मीडिया भर्ती और कट्टरपंथ के आरोप सामने आए हैं।
खबर विस्तार : -
लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए अब तक 52 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 12 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से पिस्टल, कारतूस, चाकू, ज्वलनशील लिक्विड और आपत्तिजनक पोस्टर समेत कई सामग्री बरामद की गई है। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और इसके संपर्क में आए संदिग्धों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, शहजाद भट्टी नेटवर्क पर सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपने साथ जोड़ने और उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकेलने का आरोप है। जांच एजेंसियां नेटवर्क के संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
संयुक्त अभियानों में संदिग्धों की जांच
उत्तर प्रदेश में इस नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग चरणों में बड़े स्तर पर अभियान चलाए गए। 26 मई को केंद्रीय एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान के दौरान करीब 175 संदिग्धों की जांच की गई थी। इनमें से नेटवर्क से जुड़े करीब 60 संदिग्धों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई थी। इसके बाद 12 अगस्त को प्रदेश स्तर पर संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया। इस अभियान के दौरान करीब 62 लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच संपर्कों और उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
पुलिस का दावा है कि इन अभियानों का उद्देश्य नेटवर्क के संभावित विस्तार को रोकना और उससे जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करना है। अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तरीकों की भी जांच की जा रही है।
चौथी अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश
उत्तर प्रदेश पुलिस ने जुलाई 2026 में केंद्र सरकार से शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित कर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की चौथी अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की थी। पुलिस की ओर से कहा गया है कि नेटवर्क को ध्वस्त करने और उसकी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई लगातार जारी है। जांच के दौरान सामने आ रही जानकारियों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
चौथी अनुसूची में किसी व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने का प्रावधान है। हालांकि, किसी संगठन या नेटवर्क के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उसकी अंतिम स्थिति संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करती है।
14 राज्यों में कार्रवाई का दावा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में दावा किया था कि 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने शहजाद भट्टी मॉड्यूल को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उनके मुताबिक, देश के 14 राज्यों में चलाए गए समन्वित अभियानों के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई के बाद विभिन्न राज्यों में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की गतिविधियों की जांच और गिरफ्तारी का सिलसिला जारी है। उत्तर प्रदेश में अब तक की कार्रवाई इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।
युवाओं की भर्ती को लेकर चिंता
जांच में शामिल अधिकारियों के हवाले से सामने आया है कि शहजाद भट्टी मॉड्यूल उनके सामने आए चुनौतीपूर्ण मॉड्यूलों में से एक था। अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय युवाओं को प्रभावित कर उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता जांच एजेंसियों के लिए विशेष चिंता का विषय रही।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि भट्टी युवाओं को अपनी विचारधारा और प्रभाव के जरिए अपने साथ जोड़ने में सफल रहा। कथित तौर पर युवाओं को अपेक्षाकृत कम रकम देकर नेटवर्क की गतिविधियों में शामिल किया जाता था। एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि युवाओं की पहचान कैसे की जाती थी, उनसे किस माध्यम से संपर्क किया जाता था और उन्हें नेटवर्क से जोड़ने के बाद किस तरह की भूमिका दी जाती थी। अधिकारियों के अनुसार, भट्टी के सोशल मीडिया प्रभाव का इस्तेमाल युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का यह भी दावा रहा है कि आईएसआई द्वारा भारत में एक बड़े मॉड्यूल के संचालन के लिए चुने जाने से पहले भट्टी एक इन्फ्लुएंसर के रूप में सक्रिय था।
जांच और कार्रवाई आगे भी जारी
उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, डिजिटल संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित सहयोगियों की भी जांच की जा रही है। 52 गिरफ्तारियों और 12 मुकदमों के बाद पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर चलाए जा रहे अभियानों का उद्देश्य नेटवर्क के बचे हुए संपर्कों को चिन्हित करना और उसकी गतिविधियों को पूरी तरह रोकना है।
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