Tejashwi Yadav Attacks Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में आए हालिया भूचाल के बाद आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और भाजपा के साथ गठबंधन पर कड़ा प्रहार किया है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीतीश कुमार ने बापू के हत्यारों की विचारधारा को बढ़ावा देकर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की आत्मा को ठेस पहुँचाई है।
राजद कार्यालय में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव काफी हमलावर नजर आए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की भाजपा और आरएसएस के प्रति बदलती सोच का ही परिणाम है कि आज बिहार में वैचारिक समझौता किया गया है। तेजस्वी ने भावुक लहजे में कहा, "आज बापू के हत्यारे नाथूराम गोडसे की नीतियों पर चलने वालों को सत्ता की चाबी सौंप दी गई है। यह न केवल लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह बाबा साहेब अंबेडकर के उन सिद्धांतों और विचारों का भी अपमान है, जिनके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया।"
मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए तेजस्वी यादव ने समाज के वंचित वर्गों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह की राजनीति हावी हो रही है, उसके खिलाफ पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज को एक साथ खड़ा होना होगा। तेजस्वी ने संकल्प लेते हुए कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों को कमजोर करने के लिए अब 'सदन से सड़क' तक की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ केवल निरंतर संघर्ष और आंदोलन ही एकमात्र रास्ता है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने 'परिवारवाद' के मुद्दे पर उनकी दोहरी नीति को उजागर किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग मंचों से परिवारवाद के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करते थे, आज वही लोग बिना किसी सामाजिक संघर्ष या आंदोलन के लोगों को विधायक और मंत्री बना रहे हैं। विशेष रूप से सम्राट चौधरी का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने उन्हें "लालू की पाठशाला का छात्र" करार दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में याद दिलाया कि सम्राट चौधरी को राजनीति की मुख्यधारा में लाने, उन्हें पहली बार विधायक और मंत्री बनाने का श्रेय लालू प्रसाद यादव को ही जाता है। "सम्राट चौधरी आज भले ही दूसरी तरफ की राजनीति कर रहे हों, लेकिन उनकी राजनीतिक नींव और शिक्षा लालू यादव की विचारधारा पर ही टिकी है। यह दिलचस्प है कि भाजपा को भी अब लालू यादव की विचारधारा से निकले लोगों के इर्द-गिर्द ही अपनी बिसात बिछानी पड़ रही है।"
तेजस्वी यादव के इस बयान ने बिहार की सियासत में 'विचारधारा की जंग' को और तेज कर दिया है। जहाँ एक तरफ एनडीए सरकार अपनी नई पारी की शुरुआत कर रही है, वहीं तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अंबेडकरवादी और गांधीवादी मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी खेमे से कड़ा मोर्चा संभालेंगे। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह वैचारिक लड़ाई बिहार की जनता के बीच क्या रंग लाती है।
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