New Three Language Policy पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और सीबीएसई को थमाया नोटिस
खबर सार :-
सीबीएसई की नई तीन भाषा नीति (New Three-Language Policy) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी किया है। नौवीं कक्षा के छात्रों पर अचानक दो नई भाषाओं का बोझ डालने वाली इस नीति पर अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा लागू की जा रही नई तीन भाषा नीति (New Three Language Policy) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और सीबीएसई से जवाब तलब किया है। उच्चतम न्यायालय ने इस विवादित नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख मुकर्रर की है।
याचिकाओं का लंबा सिलसिला
यह पहली बार नहीं है जब नई तीन भाषा नीति (New Three Language Policy) को अदालत में चुनौती दी गई है। इससे पहले बीते 18 जून को भी 'फ्रेंड्स ऑफ पीपल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी' नामक एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) की तरफ से दायर की गई ऐसी ही एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र और सीबीएसई को नोटिस भेजा था। वहीं, 27 मई को भी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के एक संयुक्त मोर्चे द्वारा दाखिल याचिका पर कोर्ट ने संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। लगातार आ रही इन याचिकाओं से साफ है कि इस नीति को लेकर जमीनी स्तर पर भारी असंतोष है।
क्या है नया नियम और क्यों हो रहा विरोध?
दरअसल, सीबीएसई की इस नई तीन भाषा नीति (New Three Language Policy) के तहत कक्षा नौवीं से छात्रों के लिए दो अतिरिक्त भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। नियम के मुताबिक, इन तीन भाषाओं के विकल्प में से कम से कम दो भारतीय भाषाओं (Indian Languages) का होना बेहद जरूरी है। अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस शैक्षणिक सत्र से अचानक नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों पर दो नई भाषाओं का बोझ डालना उनके भविष्य से खिलवाड़ करने जैसा है। याचिका में कहा गया है कि अचानक से थोपी गई यह नई तीन भाषा नीति (New Three Language Policy) छात्रों की दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं (Board Exams) की तैयारी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
हितधारकों को नहीं लिया भरोसे में
अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चे रातोंरात दो नई भाषाएं कैसे सीख सकते हैं और कुछ ही महीनों बाद दसवीं की बोर्ड परीक्षा में उनके पेपर कैसे दे पाएंगे? याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई ने बिना किसी पूर्व तैयारी या छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों जैसे मुख्य हितधारकों (Stakeholders) से व्यापक विचार-विमर्श किए बिना ही इस बड़े बदलाव को आनन-फानन में लागू कर दिया है। इसके अलावा, यदि कोई छात्र फ्रेंच या जर्मन जैसी किसी विदेशी भाषा (Foreign Language) की पढ़ाई करना चाहता है, तो उसके सामने भी मुश्किलें खड़ी कर दी गई हैं। नए नियमों के अनुसार, विदेशी भाषा को केवल तीसरी भाषा के रूप में ही चुना जा सकता है, जिससे छात्रों के पास विकल्पों की कमी हो गई है। यह पूरी नीति एक जुलाई से प्रभावी हो चुकी है, जिसके कारण अब छात्र और स्कूल दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं। अब सभी की नजरें 29 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।
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