Pashupati seal controversy: ऑड्रे ट्रुश्के के बयान पर भड़के भारत के संत, कहा- अमेरिका मांगे माफी
खबर सार :-
संतों का कहना है कि भारतीय सभ्यता और उसके सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर विदेशी विद्वानों द्वारा बार-बार विवाद खड़ा करने की कोशिश की जाती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन विरासत और धार्मिक प्रतीकों की व्याख्या तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर होनी चाहिए, न कि पूर्वाग्रहों के आधार पर।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः हड़प्पा सभ्यता की लगभग 4300 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली पशुपति सील को लेकर उठे विवाद ने नया राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श खड़ा कर दिया है। अमेरिकी इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के द्वारा सील की पारंपरिक व्याख्या पर सवाल उठाए जाने के बाद अयोध्या के साधु-संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों ने इसे भारतीय इतिहास, संस्कृति और सनातन परंपरा के खिलाफ भ्रामक प्रचार करार देते हुए अमेरिका से इस मामले में माफी मांगने की मांग की है।
संत-महंतों में नाराजगी
महंत देवेशाचार्य महाराज ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ विदेशी इतिहासकार भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की संस्कृति, परंपरा और सनातन मूल्यों को लेकर लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार, किसी भी देश या विद्वान को दूसरे देश की आस्था और इतिहास के संबंध में भ्रामक प्रचार करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ऑड्रे ट्रुश्के की टिप्पणी भारतीय भावनाओं को आहत करने वाली है और अमेरिका को इस मामले में स्पष्टीकरण देने के साथ-साथ माफी भी मांगनी चाहिए।
अयोध्या धाम के महंत सीताराम दास ने भी अमेरिकी इतिहासकार के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पशुपति सील को लेकर वर्षों से स्थापित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को सनातन संस्कृति की गहरी समझ नहीं है, वह इस विषय पर प्रामाणिक टिप्पणी नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि विदेशी शक्तियां समय-समय पर सनातन संस्कृति के खिलाफ दुष्प्रचार करती रही हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसे मिटाया नहीं जा सकता।
आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने भी ट्रुश्के के दावों को पूरी तरह भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि हड़प्पा काल से प्राप्त सील पर अंकित आकृति को लंबे समय से पशुपति स्वरूप से जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने भगवान शिव के पशुपति स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि नेपाल में आज भी पशुपतिनाथ मंदिर विश्वभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान शिव का वाहन नंदी बैल है और सील पर मौजूद पशु प्रतीकों को इसी संदर्भ में देखा जाता है।
वरुण दास ने ऑड्रे ट्रुश्के के उस तर्क को भी खारिज किया जिसमें उन्होंने सील को प्रोटो-एलामाइट सभ्यता की कलात्मक परंपरा से प्रभावित बताया था। संत का कहना है कि प्रोटो-एलामाइट सभ्यता का कालखंड लगभग 3200 से 2700 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है, जबकि संबंधित सील को उससे कहीं अधिक प्राचीन माना जाता है। इसलिए दोनों के बीच सीधा संबंध स्थापित करना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
कब शुरू हुआ विवाद
दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब भारत के संस्कृति मंत्रालय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर पशुपति सील की तस्वीर साझा की। मंत्रालय ने पोस्ट में कहा था कि सील पर योग मुद्रा में विराजमान आकृति भगवान शिव के आदि स्वरूप पशुपति का प्रतिनिधित्व करती है। मंत्रालय ने इसे भारतीय सभ्यता की सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसकी झलक आज भी योग, मंदिर परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं में दिखाई देती है।
इसके बाद इतिहासकार ऑड्रे ट्रुश्के ने इस व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि सील को सीधे भगवान शिव से जोड़ना ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सील की कलात्मक शैली में प्रोटो-एलामाइट सभ्यता के प्रभाव के संकेत दिखाई देते हैं।
बहुत पुराना है मतभेद
हालांकि इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच पशुपति सील की व्याख्या को लेकर लंबे समय से अलग-अलग मत मौजूद हैं। एक पक्ष इसे भगवान शिव के प्रारंभिक स्वरूप से जोड़ता है, जबकि दूसरा पक्ष इसे हड़प्पा सभ्यता के किसी स्थानीय देवता, योगी या प्रतीकात्मक धार्मिक आकृति के रूप में देखता है। इसी बहस के बीच अयोध्या के संतों की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को धार्मिक और सांस्कृतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
रक्षा मंत्रालय की एसओपी से हथियारों-रक्षा उपकरणों का परीक्षण होगा आसान
2026-10-07
-
फर्जीवाड़ा में डूबे रहे दो अधिकारी, लोन-नौकरी और कालाधन के लेनदेन में फंसे, दोनों गिरफ्तार
2026-10-07
-
जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने पर PM मोदी ने देश को किया संबोधित
2026-10-07
-
INDIA bloc Protest: राहुल-प्रियंका समेत कई नेताओं पर की FIR
2026-10-07
-
कारोबारियों को बिना बताए कम कर दिए दूध के दाम, समितियों के खिलाफ Tiruchi में प्रदर्शन की तैयारी
2026-10-07
-
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित संभालेंगे वायुसेना की कमान
2026-10-06
-
छोटे उद्योगों को 10 हजार करोड़ का बूस्टर, कैबिनेट ने दी मंजूरी
2026-10-06
-
SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन का जोरदार प्रदर्शन, धरने पर बैठ राहुल-प्रियंका
2026-10-06
-
भारतीय नौसेना में शामिल हुआ ‘सूर्या’, समुद्री ताकत को मिलेगी नई धार
2026-10-06
-
भीखनपुर 12 नंबर गुमटी पर जाम में फंस जाती हैं एंबुलेंस, मरीज तड़पने के लिए विवश, आंदोलन की तैयारी तेज
2026-10-06
-
पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए हो रहा मतदान
2026-10-06
-
Jantar-Mantar पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
2026-10-06
-
झारखंड बे-मौत मर रहे जंगल में हाथी, पोस्टमार्टम के लिए पहुंच रहे अधिकारी
2026-10-05
-
32.39 करोड़ रुपये की जब्त ड्रग्स नष्ट, 95 आरोपी गिरफ्तार
2026-10-05
-
भारतीय नौसेना में शामिल होगा पहला फ्लीट सपोर्ट पोत, बढ़ेगी ताकत
2026-10-05