आम लोगों को राहत: सस्ते प्याज के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेनें शुरू, बाजारों में पहुंचेगी भरपूर आपूर्ति
खबर सार :-
देश में प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार वर्तमान में प्याज का उत्पादन और बफर स्टॉक पर्याप्त है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश भर के बाजारों में प्याज की आने वाली मात्रा, उपलब्धता और दुकानों पर इसके दामों पर बारीक नजर रख रही है। मकसद यह है कि त्योहारों के समय आम लोगों पर महंगाई का बोझ न पड़े। सरकारी सूत्रों ने सोमवार को बताया कि आने वाले महीनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में प्याज का भरपूर स्टॉक मौजूद है। सरकार की योजना यह है कि बाजार में प्याज की मांग और सप्लाई बनी रहे, लोगों को सस्ती दरों पर प्याज मिले और किसानों को भी अपनी फसल की सही कीमत मिल सके।
अनुमान के मुताबिक साल 2025-26 में देश में प्याज की कुल पैदावार लगभग 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है। यह आंकड़ा पिछले साल पैदा हुए 307.67 लाख मीट्रिक टन प्याज के बराबर ही है। फसल की पैदावार सही रहने के साथ-साथ सरकार ने जरूरत के समय काम आने के लिए प्याज का एक बड़ा इमरजेंसी स्टॉक (बफर स्टॉक) भी जमा करके रखा है। जब भी देश के किसी हिस्से में प्याज की कमी होगी या दाम तेजी से बढ़ेंगे, तब इस जमा प्याज को बाजार में उतारा जाएगा।
दामों पर नियंत्रण और मौसमी बदलाव
आमतौर पर हर साल अगस्त और सितंबर के महीनों में प्याज के दाम थोड़े बढ़ जाते हैं। जानकारों और बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इन महीनों में आने वाले बड़े त्योहारों के कारण अचानक प्याज की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा बारिश और खराब मौसम की वजह से सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में दिक्कत आती है। प्याज उगाने वाली जगहों से शहरों तक प्याज पहुंचने में समय लगने की वजह से भी थोड़े समय के लिए कमी हो जाती है।
सरकार की दाम रोकने की नीति का मुख्य उद्देश्य इसी मौसमी तेजी के असर को कम करना है। इसके तहत बड़े शहरों और प्रमुख मंडियों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाई जाती है। सीधी खुदरा बिक्री और सस्ते दामों पर प्याज बेचने से जमाखोरी और बनावटी तेजी पर रोक लगती है। अधिकारियों का कहना है कि जमा स्टॉक को बहुत समझदारी और योजना के साथ अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट देखकर ही बाजार में निकाला जाता है।
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‘कांदा एक्सप्रेस’ से माल ढोने में तेजी
प्याज को एक जगह से दूसरी जगह जल्दी और सस्ते में पहुंचाने के लिए सरकार ने ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम की पहल को बड़े पैमाने पर शुरू किया है। इसमें भारतीय रेलवे की मालगाड़ियों के जरिए भारी मात्रा में प्याज भेजा जाता है। ट्रकों के मुकाबले ट्रेन से प्याज भेजने पर भाड़े का खर्च बहुत कम आता है और प्याज बिना खराब हुए बहुत कम समय में दूर-दराज के शहरों तक पहुंच जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में प्रयोग के तौर पर शुरू की गई इस योजना में 14 मालगाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था, जिनसे लगभग 12,000 मीट्रिक टन प्याज 5 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया था। इसे सफल देखते हुए साल 2025-26 में इसे और बढ़ाया गया। इस दौरान 86 मालगाड़ियों के जरिए लगभग 88,000 मीट्रिक टन प्याज 16 बड़े शहरों तक भेजा गया, जिससे वहां कीमतें काबू में रहीं।
नासिक से प्याज की नई खेप रवाना
पिछले साल की सफलता को देखते हुए सरकार ने 24 अगस्त से महाराष्ट्र के नासिक से बड़े शहरों के लिए प्याज भेजना और जमा स्टॉक को बेचना फिर से शुरू कर दिया है। शुरुआत में इस पहल के तहत दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत के शहरों पर ध्यान दिया गया है। इनमें चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे 5 बड़े शहर शामिल हैं। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे दूसरे राज्यों या शहरों से मांग आएगी, वैसे-वैसे इस योजना को अन्य मंडियों तक बढ़ा दिया जाएगा। जमा स्टॉक को धीरे-धीरे बाजार में उतारने का मकसद यह है कि किसी भी इलाके में प्याज की कमी न हो। जरूरत पड़ने पर सरकार माल ढोने और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अतिरिक्त मदद देने को तैयार है।
प्याज के दाम बढ़ने से महंगाई पर पड़ता है असर
भारत में प्याज सिर्फ एक सब्जी नहीं है, बल्कि इसके दाम बढ़ने से पूरी महंगाई पर असर पड़ता है। पिछले कुछ सालों में देर से मानसून आने, अचानक बारिश होने या फसल खराब होने की वजह से कई जगहों पर प्याज के दाम अचानक बहुत बढ़ जाते थे। इन दिक्कतों को हमेशा के लिए दूर करने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने प्याज का जमा स्टॉक बनाने की नीति शुरू की थी।
साल 2024-25 में जब कई राज्यों में भारी गर्मी और बारिश से फसल को नुकसान हुआ था, तब केंद्र सरकार ने नासिक और प्याज उगाने वाले इलाकों से प्याज जुटाकर 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेनें चलाई थीं। पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में ट्रेन से प्याज भेजने पर पहुंचने के समय में 40 से 50 फीसदी तक की बचत हुई थी। इसी सफलता के आधार पर अब ट्रेन से प्याज भेजने और बफर स्टॉक के इस्तेमाल को एक पक्का नियम बना लिया गया है। सरकार की इस योजना से जहां बिचौलियों की जमाखोरी पर लगाम लगती है, वहीं आम लोगों को पूरे साल सही दाम पर प्याज मिलता रहता है।
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