Shangri-La Dialogue 2026: भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर जोर, रक्षा सचिव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से की बैठक

खबर सार :-
शांगरी-ला डायलॉग में भारत के रक्षा सचिव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और समुद्री सहयोग पर चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंच एशिया और विश्व की रणनीतिक सुरक्षा स्थितियों को समझने और सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
Shangri-La Dialogue 2026: भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर जोर, रक्षा सचिव ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से की बैठक
खबर विस्तार : -

Shangri-La Dialogue 2026: शांगरी-ला डायलॉग 2026 में हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर गए भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने रविवार को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से महत्वपूर्ण बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी सदन की सशस्त्र सेवा समिति के सदस्य पैट हैरिगन कर रहे थे। बैठक का मुख्य फोकस द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर रहा।

भारत के रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी

भारत के रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क निदेशालय (डीआरडीओ) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा की कि इस मुलाकात में दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की मजबूती को दोहराया। बातचीत में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हित, रक्षा सहयोग का विस्तार और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

इससे पहले राजेश कुमार सिंह ने शांगरी-ला डायलॉग के दौरान न्यूजीलैंड के रक्षा मंत्री क्रिस पेनक और सिंगापुर के रक्षा मंत्री चान चुन सिंग के साथ सार्थक द्विपक्षीय बातचीत की। इन बैठकों में समुद्री सहयोग बढ़ाने, सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धताओं पर जोर दिया गया।

तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में रक्षा सचिव शुक्रवार से रविवार तक कई महत्वपूर्ण बैठकों और चर्चा सत्रों में शामिल रहे। उन्होंने इस दौरान थिंक टैंक विशेषज्ञों और अकादमिक विशेषज्ञों से भी बातचीत की। इन चर्चाओं का फोकस इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना, रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना, और नई तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर रहा।

क्या है शांगरी-ला डायलॉग

शांगरी-ला डायलॉग, जो सिंगापुर में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) द्वारा आयोजित किया जाता है, एशिया का प्रमुख रक्षा और सुरक्षा शिखर सम्मेलन माना जाता है। इसे अक्सर 'एशिया सुरक्षा शिखर सम्मेलन' के रूप में भी जाना जाता है। सम्मेलन में दुनिया भर के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख और नीति निर्माता शामिल होते हैं। यह मंच न केवल बहुपक्षीय चर्चा के लिए, बल्कि अलग-अलग देशों के प्रतिनिधियों के बीच द्विपक्षीय बैठकों और समझौतों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

शांगरी-ला डायलॉग में एशिया-प्रशांत, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और अन्य क्षेत्रों के नीति निर्माता शामिल होते हैं। यह सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और उनसे निपटने की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करता है। 

राजेश कुमार सिंह ने बैठक के बाद कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग पहले से अधिक मजबूत और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने जोर दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के साझा हित में है। उन्होंने सम्मेलन के माध्यम से क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

शांगरी-ला डायलॉग 2026 ने यह स्पष्ट किया कि भारत, अमेरिका और अन्य साझेदार देश न केवल द्विपक्षीय रक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी सक्रिय हैं। इस वर्ष का सम्मेलन क्षेत्रीय सुरक्षा, तकनीकी साझेदारी और सामरिक सहयोग की दिशा में नए कदमों का मार्ग प्रशस्त करता दिख रहा है।


 

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