टाटा संस की लिस्टिंग पर ट्रस्ट में घमासान! दो ट्रस्टियों पर फैसले कमजोर करने के गंभीर आरोप

खबर सार :-

टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद गहराते दिख रहे हैं। वरिष्ठ ट्रस्टियों ने वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर पूर्व फैसलों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। अब लिस्टिंग और अनलिस्टेड रहने के विकल्पों पर नजर है।
टाटा संस लिस्टिंग विवाद: ट्रस्टियों के बीच बढ़ी तकरार, समाधान पर नजर

खबर विस्तार : -

Tata Sons listing: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आते दिख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के वरिष्ठ ट्रस्टियों ने साथी ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर बोर्ड के प्रस्तावों को कमजोर करने और अपने न्यासी दायित्वों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में एक पत्र सामने आया है, जिस पर नोएल एन. टाटा, डेरियस जे. खंबाटा, नेविल एन. टाटा और भास्कर भट्ट के हस्ताक्षर बताए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पत्र टाटा संस की स्वामित्व संरचना और कंपनी की संभावित लिस्टिंग को लेकर ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है।

अनलिस्टेड रखने का फैसला बना विवाद की जड़

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्र में कहा गया है कि टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखना लंबे समय से टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी की स्थापित एवं सहमति वाली नीति रही है। मार्च 2024 में टाटा संस के बोर्ड ने भी कथित तौर पर सर्वसम्मति से कंपनी को अनलिस्टेड रखने का निर्णय लिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने भी सर्वसम्मति से इसी रुख को दोहराया था। साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ इस विषय पर संवाद जारी रखने पर सहमति बनी थी। वरिष्ठ ट्रस्टियों का कहना है कि जुलाई 2025 के प्रस्तावों को वापस नहीं लिया गया था। आरोप है कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने अपनी बदली हुई राय को ट्रस्टियों के सामने सामूहिक चर्चा के लिए रखने या पुराने फैसलों की औपचारिक समीक्षा की मांग करने के बजाय सार्वजनिक रूप से टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन किया।

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सार्वजनिक बयान पर भी उठे सवाल

पत्र में कथित तौर पर कहा गया है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान टाटा ट्रस्ट्स के आधिकारिक निर्णयों को कमजोर कर सकते हैं। साथ ही इससे आरबीआई के समक्ष टाटा संस की लंबित प्रक्रियाओं और आवेदनों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस की नियामकीय स्थिति को लेकर विकल्पों पर चर्चा तेज है। कंपनी को आरबीआई से जुड़े मानदंडों के संदर्भ में भी समाधान तलाशना है। ऐसे में लिस्टिंग बनाम अनलिस्टेड रहने का मुद्दा ट्रस्ट्स के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।

विलय का विकल्प भी चर्चा में

रिपोर्ट के अनुसार, 28 सितंबर को दिए गए एक प्रस्ताव में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स के टाटा संस में विलय का सुझाव दिया गया। इसे उन संभावित विकल्पों में से एक बताया गया है, जिनसे कंपनी सार्वजनिक लिस्टिंग के रास्ते पर गए बिना आरबीआई के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) से जुड़े मानदंडों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टाटा संस के बोर्ड ने ट्रस्ट्स से केवल लिस्टिंग पर विचार करने के बजाय सभी उपलब्ध विकल्पों की जांच करने को कहा था। वरिष्ठ ट्रस्टियों का कहना है कि उन्होंने बोर्ड की इसी अपेक्षा के अनुरूप सार्वजनिक लिस्टिंग के अलावा अन्य संभावित रास्तों पर भी विचार किया।

आरबीआई के नियमों ने बढ़ाई अहमियत

टाटा संस के भविष्य को लेकर यह बहस ऐसे वक्त तेज हुई है जब कंपनी के सामने आरबीआई से जुड़े नियामकीय मुद्दों का समाधान तलाशने की चुनौती है। एक ओर सार्वजनिक लिस्टिंग का विकल्प चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट्स के भीतर कंपनी को अनलिस्टेड बनाए रखने की पुरानी नीति का समर्थन भी मौजूद है। इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि टाटा संस की लिस्टिंग का फैसला केवल कारोबारी रणनीति का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह ट्रस्ट्स की नीति, बोर्ड के प्रस्तावों और नियामकीय अनुपालन से भी जुड़ गया है। हालांकि, सामने आए आरोपों और पत्र में व्यक्त विचार संबंधित रिपोर्ट के आधार पर हैं; अंतिम स्थिति टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस की आधिकारिक स्पष्टता से ही तय होगी।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य सवाल)...

1. टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर विवाद क्या है?

टाटा ट्रस्ट्स के भीतर टाटा संस को लिस्टेड या अनलिस्टेड रखने को लेकर मतभेद सामने आए हैं। वरिष्ठ ट्रस्टियों ने दो साथी ट्रस्टियों पर पूर्व फैसलों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

2. वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर क्या आरोप लगाए गए हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, आरोप है कि दोनों ने अपनी बदली हुई राय को ट्रस्टियों के सामने सामूहिक चर्चा के लिए रखने के बजाय सार्वजनिक रूप से टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन किया।

3. टाटा संस के पास लिस्टिंग के अलावा क्या विकल्प है?

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियों के टाटा संस में विलय जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे आरबीआई के एनबीएफसी संबंधी मानदंडों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।

 

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