SEBI Year of Reform: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल को बाजार के लिए ‘सुधार का वर्ष’ बताया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीता साल वित्तीय और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नीतिगत सुधारों, तकनीकी बदलावों और नियामकीय मजबूती का साल रहा। पांडेय के मुताबिक चुनौतियां केवल टैरिफ, नीतियों या वैश्विक घटनाक्रमों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हुए बदलावों ने भी पूंजी बाजार के लिए नई जटिलताएं पैदा कीं। ऐसे माहौल में सेबी ने संतुलित और प्रभावी नियमन की दिशा में ठोस कदम उठाए।
सेबी चेयरमैन ने बताया कि पूरे साल काम करने की रणनीति चार प्रमुख सिद्धांतों-ट्रस्ट (विश्वास), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता), टीमवर्क और टेक्नोलॉजी-पर आधारित रही। उनका कहना है कि नियामक का लक्ष्य ‘ऑप्टिमम रेगुलेशन’ लागू करना है, यानी न तो जरूरत से ज्यादा सख्ती हो और न ही अत्यधिक ढील। एक संतुलित व्यवस्था के माध्यम से निवेशकों के हितों की रक्षा और बाजार के विकास के बीच संतुलन बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) और निगरानी (सर्विलांस) तंत्र को और मजबूत किया गया है ताकि नियमों का पालन बेहतर ढंग से सुनिश्चित हो सके।
पांडेय ने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ईज ऑफ इन्वेस्टमेंट, मार्केट डेवलपमेंट, मार्केट रेगुलेटरी इंफ्रास्ट्रक्चर और इक्विटी मार्केट के विस्तार जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार किए गए। उनके अनुसार, सभी हितधारकों-निवेशकों, कंपनियों, एक्सचेंजों और मध्यस्थों-ने मिलकर सुधारों को आगे बढ़ाया। यह वर्ष केवल नीतिगत बदलावों का नहीं, बल्कि संस्थागत क्षमता निर्माण और प्रक्रियात्मक सरलीकरण का भी रहा।
निवेशक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सेबी चेयरमैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बढ़ाया गया है। इसके तहत ‘सुदर्शन’ नामक एआई टूल विकसित किया गया है। इस टूल की मदद से उन तथाकथित फिनफ्लुएंसर्स की पहचान की जा रही है, जो नियमों का उल्लंघन कर निवेशकों को गुमराह करते हैं। पांडेय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर स्पेस से हटाया भी जा सकता है। यह कदम डिजिटल युग में बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सेबी का दायित्व तीन तीन स्तंभों पर टिका हुआ है। इसमें निवेशक संरक्षण, बाजार का विकास और बाजार का नियमन प्रमुख हैं। तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि ये जिम्मेदारियां संसद द्वारा निर्धारित की गई हैं और सेबी इन्हें प्रभावी रूप से निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा तथा बाजार के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि बहुत छोटे उद्यम सीधे पूंजी बाजार तक नहीं पहुंच पाते, लेकिन तेजी से बढ़ने की क्षमता रखने वाले छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) पूंजी बाजार के माध्यम से पूंजी जुटा सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों में एसएमई बोर्ड की सुविधा उपलब्ध है, हालांकि इन कंपनियों को बेहतर मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता है। सेबी इस दिशा में भी सहयोगात्मक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।
पांडेय ने निवेशकों को चेतावनी देते हुए कहा कि पूंजी बाजार में असाधारण रिटर्न आसानी से नहीं मिलते। यदि पिछले कुछ वर्षों में बाजार ने 12 से 14 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया है, तो यह मान लेना गलत होगा कि हर साल यही रिटर्न मिलेगा। उन्होंने निवेशकों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने, जोखिम को समझने और विवेकपूर्ण निवेश करने की सलाह दी।
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