अक्टूबर में 0.25% बढ़ सकती है ब्याज दर, महंगाई 5.5% और 6 लाख करोड़ की लिक्विडिटी चुनौती

खबर सार :-

एचएसबीसी की रिपोर्ट में अक्टूबर में आरबीआई द्वारा ब्याज दर 0.25% बढ़ाकर 5.5% करने का अनुमान है। महंगाई 5.5% तक पहुंच सकती है, जबकि बैंकिंग सिस्टम से 6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता हटाने की जरूरत बताई गई है।
अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान

खबर विस्तार : -

HSBC Report: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक से पहले ब्याज दरों को लेकर अहम अनुमान सामने आया है। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई अक्टूबर की बैठक में नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे ब्याज दर 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले महीनों में बैंकिंग सिस्टम से करीब 6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता निकालने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, नकदी की उपलब्धता में कमी धीरे-धीरे होने का अनुमान है। अगर कैश रिजर्व रेश्यो (सीआरआर) बढ़ाने जैसे कड़े उपाय नहीं किए जाते हैं, तो तरलता को चरणबद्ध तरीके से कम किया जा सकता है।

सितंबर में 5.5% तक पहुंच सकती है महंगाई

एचएसबीसी की रिपोर्ट में महंगाई को लेकर भी चिंता जताई गई है। अनुमान है कि उपभोक्ता महंगाई अगस्त के 4.8 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में करीब 5.5 प्रतिशत हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की चौथी तिमाही में महंगाई औसतन 6 प्रतिशत से कुछ अधिक रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य महंगाई में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है और इसकी प्रमुख वजह सर्विस सेक्टर में महंगाई है। रिपोर्ट का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में महंगाई औसतन 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है। महंगाई में संभावित तेजी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब आरबीआई मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक वृद्धि और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन साधता है। ब्याज दर में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे कर्ज की लागत पर भी असर पड़ सकता है।

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6 लाख करोड़ की तरलता निकालने की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में मौजूद करीब 6 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता को अलग-अलग माध्यमों से मैनेज किया जा सकता है। इसमें लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की जरूरत सर्कुलेशन में मौजूद करेंसी के जरिए पूरी होने की संभावना है। बाकी तरलता को ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) सेल्स, फॉरेन-एक्सचेंज स्पॉट सेल्स, एफएक्स स्वैप और वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसे मौजूदा उपायों के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है। रिपोर्ट का मानना है कि नकदी में कमी अचानक करने के बजाय धीरे-धीरे की जा सकती है।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ा रहीं चिंता

एचएसबीसी ने बाहरी आर्थिक परिस्थितियों को भी चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रही हैं। इसके साथ ही 2027 के लिए तेल की कीमत का अनुमान भी 20 डॉलर बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल किया गया है। महंगे तेल के अलावा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती को भी उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह के लिए प्रतिकूल माना गया है। रिपोर्ट में हाल में भारत से पूंजी की निकासी का भी उल्लेख किया गया है।

निर्यात में मजबूती से भारत को सहारा

इन चुनौतियों के बावजूद रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, यूके-भारत मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के एक महीने बाद ब्रिटेन को भारत के निर्यात में महीने-दर-महीने आधार पर 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच भारत के व्यापारिक प्रदर्शन में कुछ सकारात्मक पहलू भी मौजूद हैं। अब अक्टूबर की एमपीसी बैठक में ब्याज दर, महंगाई और बैंकिंग सिस्टम की तरलता को लेकर आरबीआई का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य सवाल)...

1. अक्टूबर में आरबीआई ब्याज दर कितनी बढ़ा सकता है?

HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर की एमपीसी बैठक में आरबीआई नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।

2. महंगाई को लेकर क्या अनुमान है?

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में 4.8 प्रतिशत रही महंगाई सितंबर में करीब 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। 2026 की चौथी तिमाही में यह औसतन 6 प्रतिशत से कुछ अधिक रहने का अनुमान है।

3. बैंकिंग सिस्टम से 6 लाख करोड़ रुपये की तरलता क्यों हटाई जा सकती है?

रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए करीब 6 लाख करोड़ रुपये निकालने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए ओएमओ सेल्स, एफएक्स स्वैप और रिवर्स रेपो जैसे उपाय इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

 

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