India Forex Reserve: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 8 मई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 6.295 अरब डॉलर बढ़कर 696.988 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही भारत का फॉरेक्स रिजर्व एक बार फिर 700 अरब डॉलर के बेहद करीब पहुंच गया है। इससे पहले के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 7.794 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह 690.693 अरब डॉलर पर आ गया था। हालांकि अब नए आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी दबावों के बावजूद मजबूती बनाए हुए है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय मुद्रा बाजार पर भी पड़ा था। डॉलर की मांग बढ़ने और रुपए पर दबाव आने के कारण आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। केंद्रीय बैंक ने रुपए को स्थिर बनाए रखने के लिए डॉलर की बिक्री की, जिससे पिछले कई हफ्तों तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली। गौरतलब है कि 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 728.494 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद लगातार गिरावट का दौर शुरू हो गया था।

ताजा आंकड़ों में सबसे बड़ी राहत सोने के भंडार यानी गोल्ड रिजर्व से मिली है। आरबीआई के अनुसार, 8 मई को समाप्त सप्ताह में देश के स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.637 अरब डॉलर बढ़कर 120.853 अरब डॉलर हो गया। सोने की कीमतों में वैश्विक स्तर पर आई तेजी और आरबीआई की मजबूत गोल्ड होल्डिंग्स ने विदेशी मुद्रा भंडार को नई मजबूती दी। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक इस समय सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि भारत समेत कई देश लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (एफसीए) भी बढ़त में रहीं। आरबीआई के मुताबिक, समीक्षा सप्ताह में एफसीए 562 मिलियन डॉलर बढ़कर 552.387 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के संदर्भ में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है। वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर इंडेक्स में नरमी का फायदा भारत के रिजर्व आंकड़ों को मिला।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) 84 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.873 अरब डॉलर हो गए। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 12 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.875 अरब डॉलर पर पहुंच गई। आर्थिक जानकारों का कहना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे आयात भुगतान, मुद्रा विनिमय दर और वैश्विक निवेशकों के भरोसे को मजबूती मिलती है।
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