ईवी की खरीद पर सब्सिडी की अवधि 2028 तक बढ़ी, पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत दोपहिया पर 5,000 रुपये तक इंसेंटिव
खबर सार :-
पीएम ई-ड्राइव की अवधि बढ़ने से इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार को आगे भी सरकारी समर्थन मिलता रहेगा। हालांकि सब्सिडी में कमी से खरीदारों को पहले जैसा लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का जोर अब केवल बिक्री बढ़ाने के बजाय चार्जिंग नेटवर्क और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने पर भी है। सीमित बजट और तय समयसीमा के कारण लाभ लेने वालों को पात्रता और दावों की अंतिम तारीख का ध्यान रखना होगा।
खबर विस्तार : -
PM E-DRIVE Scheme: इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना को दो साल और आगे बढ़ा दिया है। अब यह योजना 31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी। इसके तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने वालों को अधिकतम 5,000 रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार ने इसके लिए 11,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि नई व्यवस्था में सब्सिडी दर पहले के मुकाबले कम कर दी गई है, जिससे खरीदारों पर इसका असर पड़ेगा।
दो साल बढ़ी योजना की मियाद
केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना की अवधि दो वर्ष बढ़ा दी है। भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार, अब यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी। सरकार का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी देना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना और घरेलू ईवी विनिर्माण को मजबूती देना है। विस्तारित योजना के लिए सरकार ने कुल 11,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि का इस्तेमाल योजना के विभिन्न घटकों के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने और ईवी से जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने में किया जाएगा।
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ई-दोपहिया खरीदने पर कितना फायदा?
नई व्यवस्था के तहत 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच खरीदे गए पंजीकृत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर खरीद प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार ने इंसेंटिव की दर 2,500 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा निर्धारित की है। हालांकि, इस प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये प्रति वाहन होगी। यानी बैटरी क्षमता के आधार पर गणना होने के बावजूद किसी पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर 5,000 रुपये से ज्यादा सरकारी इंसेंटिव नहीं मिलेगा। इसके साथ ही सरकार ने पात्र वाहनों की कीमत पर भी सीमा तय की है। योजना का लाभ केवल उन इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को मिलेगा, जिनकी अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होगी।
45.79 लाख ई-दोपहिया वाहनों को मदद का लक्ष्य
सरकार ने विस्तारित पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत अधिकतम 45.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को सहायता देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए मंत्रालय की ओर से 2,767 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार की इस पहल से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की शुरुआती खरीद लागत कम करने में मदद मिल सकती है। ईवी बाजार में दोपहिया वाहन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल रोजमर्रा के आवागमन के लिए बड़ी संख्या में किया जाता है।

पहले मिलती थी दोगुनी सब्सिडी
हालांकि नई योजना में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर मिलने वाला प्रोत्साहन पहले की तुलना में कम कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में ई-दोपहिया वाहनों के लिए 5,000 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा की दर से इंसेंटिव दिया जाता था। उस समय अधिकतम प्रोत्साहन 10,000 रुपये प्रति वाहन तक था। अब प्रति किलोवाट-घंटा इंसेंटिव घटाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है और अधिकतम लाभ भी 5,000 रुपये तक सीमित कर दिया गया है। मंत्रालय ने हालांकि कहा है कि भविष्य में ईवी की लागत में कमी को देखते हुए प्रति किलोवाट-घंटा प्रोत्साहन राशि की समय-समय पर समीक्षा की जा सकती है।
कीमत का 15 फीसदी से ज्यादा लाभ नहीं
सरकार ने सब्सिडी के लिए एक और महत्वपूर्ण शर्त रखी है। इलेक्ट्रिक दोपहिया पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इसका मतलब है कि पात्र वाहन के मामले में अधिकतम निर्धारित प्रोत्साहन और वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत में से जो राशि कम होगी, वही सरकारी लाभ के रूप में दी जाएगी। इससे योजना का लाभ तय सीमा और वाहन की वास्तविक कीमत, दोनों के आधार पर नियंत्रित रहेगा।
11,900 करोड़ की फंड-लिमिटेड योजना
पीएम ई-ड्राइव योजना को सरकार ने फंड-सीमित योजना के तौर पर संचालित करने का फैसला किया है। इसका अर्थ है कि योजना के तहत कुल भुगतान 11,900 करोड़ रुपये के निर्धारित बजट तक ही सीमित रहेगा। यदि योजना की कुल निर्धारित राशि या किसी विशेष घटक के लिए आवंटित फंड समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो संबंधित घटक को बंद किया जा सकता है। इसके बाद नए दावों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए पात्र लाभार्थियों के लिए योजना की समयसीमा के साथ उपलब्ध फंड पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
दावे जमा करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2027
सरकार ने योजना के तहत सभी श्रेणियों के लिए 31 मार्च 2028 को अंतिम तारीख तय की है। वहीं सब्सिडी से जुड़े दावों को जमा करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है। योजना के विस्तार के साथ सरकार का जोर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के अलावा चार्जिंग नेटवर्क और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर भी है। इससे भारत में ईवी इकोसिस्टम को व्यापक स्तर पर विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
चार्जिंग नेटवर्क और घरेलू निर्माण पर जोर
सरकार के मुताबिक पीएम ई-ड्राइव का मकसद सिर्फ उपभोक्ताओं को आर्थिक प्रोत्साहन देना नहीं है। योजना के जरिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और देश में ईवी निर्माण को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए घरेलू उत्पादन, चार्जिंग सुविधाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....
1. पीएम ई-ड्राइव योजना कब तक बढ़ाई गई है?
पीएम ई-ड्राइव योजना को दो साल बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दिया गया है।
2. इलेक्ट्रिक दोपहिया पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर 2,500 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा की दर से इंसेंटिव मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 5,000 रुपये प्रति वाहन है।
3. सब्सिडी के लिए इलेक्ट्रिक दोपहिया की कीमत कितनी होनी चाहिए?
योजना का लाभ केवल उन इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को मिलेगा, जिनकी अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत 1.5 लाख रुपये तक है।
4. पीएम ई-ड्राइव योजना का कुल बजट कितना है?
विस्तारित पीएम ई-ड्राइव योजना के लिए सरकार ने कुल 11,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
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