इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी होगी अब ज्यादा टिकाऊ, शोधकर्ताओं ने बनाया स्मार्ट पावर सिस्टम, पेटेंट भी किया हासिल

खबर सार :-

इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की उम्र बढ़ाने के लिए शोधकर्ताओं ने हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को पेटेंट भी कर लिया है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की उम्र बढ़ाएगा स्मार्ट पावर सिस्टम

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: देश में सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोगों के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही ईवी की बैटरी की उम्र सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ईवी की बैटरी की उम्र बढ़ाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने बड़ी सफलता हासिल की है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने ऐसी हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की है, जो अचानक ब्रेक लगाने, तेज गति से वाहन चलाने और गति कम-ज्यादा करने के दौरान बैटरी पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम कर सकती है। इससे ईवी की बैटरी की उम्र बढ़ाने में काफी मदद मिलने की उम्मीद है।   

इस तकनीक का पेटेंट भी कर लिया गया है हासिल 

इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल कर लिया गया है। इस शोध को उच्च शिक्षण संस्थान एनआईटी राउरकेला की प्रो. मोनालिसा पटनायक, डॉ. प्रद्युम्न कुमार बेहरा और करण गुप्ता ने अंजाम दिया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नई प्रणाली का डिजाइन कम से कम घटकों पर आधारित है। इससे सिस्टम की जटिलता कम होती है और बैटरी को अचानक बढ़ने वाली बिजली की मांग से सुरक्षा मिलती है। दरअसल शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बार-बार रुकना और चलना पड़ता है।

शोधकर्ताओं ने बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर को जोड़ा है

इसके अलावा अचानक एक्सीलरेशन, डिसेलरेशन और ब्रेक लगाने जैसी स्थितियों में बैटरी से बहुत तेजी से करंट लिया या वापस भेजा जाता है। इससे बैटरी सेल्स पर थर्मल और विद्युत दबाव बढ़ता है और समय के साथ उनकी क्षमता तथा उम्र प्रभावित हो सकती है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए शोधकर्ताओं ने बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर को जोड़ा है। सुपरकैपेसिटर बहुत तेजी से चार्ज और डिस्चार्ज हो सकता है और अचानक पैदा होने वाली बिजली की मांग को संभाल सकता है। इससे बैटरी को तेज करंट के झटकों से राहत मिलती है और उसकी उम्र बढ़ाने में मदद मिलती है।

सरल डिजाइन है नई प्रणाली की खासियत

नई प्रणाली की खासियत इसका सरल डिजाइन है। प्रो. मोनालिसा पटनायक के मुताबिक इसमें तीन प्रमुख घटक हैं। एक घटक कन्वर्टर, एक इंडक्टर और एक सिंगल कंट्रोल सिस्टम है। एक ही कन्वर्टर बैटरी और सुपरकैपेसिटर दोनों को वाहन की विद्युत प्रणाली से जोड़ता है। इससे अतिरिक्त स्विच और नियंत्रण उपकरणों की जरूरत कम हो जाती है। वहीं इंडक्टर करंट में अचानक होने वाले उछाल को नियंत्रित करता है। सिंगल कंट्रोल सिस्टम वाहन के तेज गति पकड़ने और गति कम करने, दोनों परिस्थितियों में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है।

कम-वोल्टेज इलेक्ट्रिक वाहन प्लेटफॉर्म के लिए उपयोगी है प्रणाली 

शोधकर्ताओं ने अचानक ब्रेक लगाने, तेज और मंद गति जैसी परिस्थितियों में इस प्रणाली का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान सिस्टम ने 48 वोल्ट का स्थिर वोल्टेज बनाए रखा और बैटरी करंट में अचानक बदलाव को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की। सुपरकैपेसिटर ने भी अचानक पैदा होने वाली बिजली की जरूरत को प्रभावी ढंग से संभाला। प्रो. पटनायक के अनुसार यह प्रणाली 24 से 60 वोल्ट डीसी वाले कम-वोल्टेज इलेक्ट्रिक वाहन प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा, कार्गो ट्राइसाइकिल और कैंपस या औद्योगिक उपयोगिता वाहनों में किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा चार्जिंग स्टेशनों समेत अन्य में तकनीक का इस्तेमाल

इसके अलावा तकनीक का इस्तेमाल स्वचालित निर्देशित वाहनों, वेयरहाउस कार्ट, डीसी माइक्रोग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा चार्जिंग स्टेशनों में भी किया जा सकता है। संस्थान के मुताबिक पेटेंट मिलने के बाद यह तकनीक अब ईवी निर्माताओं, पावरट्रेन सिस्टम इंटीग्रेटर्स, फ्लीट ऑपरेटरों और ईवी रेट्रोफिट स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग के लिए तैयार है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में बैटरी की उम्र बढ़ाने वाली यह तकनीक न केवल वाहनों की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है, बल्कि लंबे समय में बैटरी बदलने की लागत को कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मददगार साबित हो सकती है।
 

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