ट्रंप का बड़ा दावा: वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति का असर, अमेरिका में सस्ता ईंधन और मज़बूत होती अर्थव्यवस्था

खबर सार :-
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति बढ़ाने की अमेरिकी नीति ने ईंधन कीमतों को नीचे लाने और अर्थव्यवस्था को राहत देने में अहम भूमिका निभाई है। सस्ता ईंधन परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत घटाता है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण संभव होता है। हालांकि, इस नीति के दीर्घकालिक वैश्विक और राजनीतिक प्रभावों पर बहस जारी रहेगी।

ट्रंप का बड़ा दावा: वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति का असर, अमेरिका में सस्ता ईंधन और मज़बूत होती अर्थव्यवस्था
खबर विस्तार : -

Trum vs Venezuela Oil: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला को लेकर अपनी नीति को देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया है। डेट्रॉइट इकनॉमिक क्लब में दिए गए भाषण में ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला से जुड़े हालिया अमेरिकी कदमों के चलते अमेरिका में ईंधन की कीमतों में कमी आई है और इसका सीधा फायदा आम जनता व पूरी अर्थव्यवस्था को मिल रहा है।

वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति की कार्रवाई सफल

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला से तेल आपूर्ति को लेकर जो कार्रवाई की है, वह पूरी तरह सफल रही है। उनके अनुसार, इससे न केवल तेल की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि गैसोलीन की कीमतों पर भी दबाव कम हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कई अमेरिकी राज्यों में पेट्रोल की कीमत ढाई डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ चुकी है, जबकि कुछ इलाकों में यह दो डॉलर प्रति गैलन से भी कम हो गई है।अपने भाषण में ट्रंप ने वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडारों का ज़िक्र करते हुए कहा कि, “उनके पास करीब 50 मिलियन बैरल तेल है। उन्होंने कहा कि इसे ले लो, यह पांच बिलियन डॉलर का है और हमने ले लिया।”

तेल ले जाने के लिए 50 बड़े जहाजों की जरूरत

ट्रंप के मुताबिक, इस तेल को अमेरिका लाकर रिफाइन किया जा रहा है, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ी है। उन्होंने विस्तार से बताया कि इतने बड़े पैमाने पर तेल लाने के लिए दुनिया के सबसे बड़े जहाजों की जरूरत पड़ती है। एक जहाज लगभग एक मिलियन बैरल तेल ले जा सकता है और पूरी खेप के लिए करीब 50 बड़े जहाजों की आवश्यकता होती है। ट्रंप ने इसे अमेरिका की ऊर्जा रणनीति की सफलता करार दिया।

सस्ते ईंधन का अर्थव्यवस्था पर असर

ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा कि सस्ता ईंधन सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा, “जब गैसोलीन 1.99 डॉलर प्रति गैलन हो जाता है, तो सब कुछ सस्ता हो जाता है। डोनट्स की कीमतें कम हो जाती हैं, क्योंकि उन्हें पहुंचाने वाले ट्रक का खर्च घट जाता है।” उनके अनुसार, परिवहन लागत कम होने से खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक की कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ता है। पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर पिछली सरकार सत्ता में बनी रहती, तो अमेरिका की आर्थिक हालत और भी खराब हो जाती। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है और अब ऊर्जा नीति को राष्ट्रीय हित में दोबारा गढ़ा गया है।

खुद को बताया वेनेजुएला का समर्थक

दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने खुद को वेनेज़ुएला का “समर्थक” बताते हुए कहा कि अमेरिका अब उस देश के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ी हुई सप्लाई से कीमतें और नीचे आएंगी, जिससे आर्थिक विकास को लगातार समर्थन मिलेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेज़ुएला को लेकर अमेरिका की नाराज़गी का एक बड़ा कारण यह था कि वहां की जेलों से अपराधियों को अमेरिका भेजा गया, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार

वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक है, लेकिन वर्षों से उस देश का तेल उत्पादन अमेरिकी प्रतिबंधों, कमजोर बुनियादी ढांचे और राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रभावित रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नीति में थोड़ा सा भी बदलाव वैश्विक तेल बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अहम मुद्दा

अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें हमेशा से एक अहम राजनीतिक मुद्दा रही हैं, खासकर कोरोना महामारी के बाद जब पेट्रोल और डीज़ल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे थे। ट्रंप का कहना है कि चाहे घरेलू उत्पादन बढ़ाना हो या विदेशी स्रोतों से आपूर्ति लानी हो, तेल और गैस की उपलब्धता बढ़ाए बिना महंगाई को काबू में करना और आर्थिक विकास को बनाए रखना संभव नहीं है।

 

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