लखनऊ, उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत के लोग ऑपरेशन सिंदूर का विजय गीत गा रहे हैं। भारत के संविधान में भी हम भारत के लोग, जैसे शब्द अनेकता में एकता के प्रतीक हैं। आतंकवादियों ने पहलगाम में जो खूनी खेल खेला था, उसमें वह कामयाब नहीं हुए, बल्कि पाकिस्तान का आतंकी स्नेह दुनिया के सामने आ गया है। भारत के वसुधैव कुटुम्बकम और देश के सहिष्णुस्वभाव से वह लोग भी परिचित हुए हैं, जो अभी तक नहीं जानते थे। देश के विपक्षी दलों के सुर वही थे, जो सत्ता पक्ष के थे। अल्पसंख्यक वही मांग कर रहे थे, जो बहुसंख्यकों की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारत की गगनभेदी मिसाइलों ने इतना कुछ कर दिया कि वह अड्डे दोबारा नहीं उठ पाएंगे। कई शहरों में सैन्य संघर्ष का यह पहला उदाहरण था।
किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर डॉ. वाल्टर लाडविग ने भी ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद कहा था कि भारत ने आतंकवादियों को दंडित करने के लिए सैन्य कार्रवाई की। यह भी सब जानते हैं कि भारत के पास रूसी, फ्रांसीसी, अमेरिकी और स्वदेशी हथियारों का ठिकाना हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान के पास चीनी, अमेरिकी और तुर्की सिस्टम हैं। इनको भारत ने पटखनी दी है। भारत का सैन्य प्रदर्शन दुनियाभर को चौंकाने वाला था। भारत के जल, थल और नभ सेना का पाकिस्तान को घेर कर उसे परास्त कर देना केवल कूटनीतिक नहीं था, विजय श्रेय के लिए भारत के वह हथियार भी हैं, जिनका डंका दुनिया में बज रहा है। भारत के पास सुसज्जित विमान हैं। रडार, बेहतरीन मारक मिसाइलें हैं। यहां अचूक निशाना है। बिक्री से ही भारत के हथियारों की दीवानगी का पता चलता है। इनको खरीदने के लिए बातचीत का सिलसिला भी तेज हुआ है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि यह नया भारत है, नया भारत किसी को छेड़ता नहीं है। जो लोग छेड़ते हैं, यह देश उनको छोड़ता नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही कहा था कि आतंकवाद पर आखिरी कील ठोंकने का वक्त आ गया है।
पाकिस्तान में ब्रह्मोस को लेकर इस बार डर भर गया है। कई देश इसकी खूबियों से इतनी जल्दी परिचित हुए कि वह भारत से जल्द ही मिसाइल की डील करना चाहते हैं। भारतीय मिसाइलें खरीदने की इच्छा रखना चाहते हैं। ब्रह्मोस, आकाश और पिनाक ने दुनिया में भारत का मान बढ़ाया हैं। भारतीय बेड़े में यह शामिल हैं। भारतीय विमानों की डिमांड भी बढ़ रही है। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर ध्रूव और डोर्नियर-228 की भूरिभूर प्रशंसा की जा रही है। दुश्मन देश को पलक झपकते ही तबाह करने वाले हथियार भारत में हैं। 155 मिमी/52 कैलिबर डीआरडीओ एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम, धनुष आर्टिलरी गन सिस्टम तो पहले से ही कई देशों को आपूर्ति की जा रही हैं।
देश की बख्तरबंद गाड़ियां भारतीय सेना को और मजबूत करती हैं। स्वदेशी बख्तरबंद गाड़ियों की डिमांड भी कई देशों में है। टैंक परिवहन के भारतीय गाड़ियों के कई मॉडल विदेशों में बिक रहे हैं। देश में बनी पनडुब्बिया, युद्धपोत, तेज इंटरसेप्टर बोट, हल्के टॉरपीडो भी भारत बेच रहा है। देश के रडार के बारे में भी अच्छी खबरें हैं। यहां के राइफल, बुलेटप्रूफ जैकेट से लेकर सैन्य बूट तक डिमांड है। भारत के संपर्क में वह देश भी है, जहां गोला-बारूद और छोटे हथियारों की मांग की जा रही है।
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