Kuwait Airport Drone Attack: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने बुधवार को एक नया और चिंताजनक मोड़ ले लिया, जब कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (International Airport) के यात्री टर्मिनल-1 (T1) को कथित ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में टर्मिनल भवन को भारी नुकसान पहुंचा है और कई लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।
कुवैती रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल सऊद अब्दुलअजीज अल-ओतैबी ने बताया कि ड्रोन हमले बुधवार सुबह हुए। प्रारंभिक जांच के आधार पर मंत्रालय ने इसे कथित ईरानी आक्रामक कार्रवाई से जोड़ते हुए कहा कि हमले का मुख्य निशाना हवाई अड्डे का यात्री टर्मिनल था। टर्मिनल पर हमले के कारण इमारत के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा और वहां मौजूद यात्रियों व कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
हमले की सूचना मिलते ही आपातकालीन सेवाओं, दमकल विभाग और चिकित्सा टीमों को सक्रिय कर दिया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश घायलों की स्थिति स्थिर है, लेकिन कुछ लोगों को गंभीर चोटें भी आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी है और हमले की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए ड्रोन तथा संभावित जिम्मेदार तत्वों की पहचान की जा रही है। कुवैत सरकार ने घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला करार दिया है। ब्रिगेडियर जनरल अल-ओतैबी ने कहा कि देश की सशस्त्र सेनाएं अन्य सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुवैत किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

घटना के बाद कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त कर दिया गया है। यात्रियों की अतिरिक्त जांच की जा रही है तथा एयरपोर्ट परिसर में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही उड़ान संचालन पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में क्षेत्र में कार्रवाई की है। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए बयान में आईआरजीसी ने कहा कि उसकी सैन्य कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई है।
IRGC के अनुसार, अमेरिकी सेना ने देर रात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट एक ईरानी तेल टैंकर को मिसाइल से निशाना बनाया था, जिससे जहाज के इंजन वाले हिस्से को नुकसान पहुंचा। संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों और क्षेत्रीय सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बताया। इसके जवाब में आईआरजीसी ने कथित तौर पर “पनाया” नामक अमेरिकी समर्थित जहाज पर मिसाइलें दागने का दावा किया। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिकी बलों ने केश्म द्वीप के दक्षिणी हिस्से में स्थित आईआरजीसी के एक संचार टॉवर पर हवाई हमला किया। संगठन का आरोप है कि इसके जवाब में उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने क्षेत्र के एक देश में मौजूद अमेरिकी हवाई एवं हेलीकॉप्टर अड्डे के साथ-साथ अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय को भी मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया।
हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आईआरजीसी के इस दावे को खारिज कर दिया है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर किसी प्रकार का सफल हमला नहीं हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने ईरानी दावों को भ्रामक बताते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा की निगरानी जारी रखने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परिवहन नेटवर्क पर भी दिखाई देने लगा है। कुवैत एयरपोर्ट पर हमला इसी बढ़ते खतरे का संकेत माना जा रहा है।
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Strait of Hormuz , जहां हालिया घटनाक्रम केंद्रित है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या अस्थिरता का असर ऊर्जा बाजार, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने हालात पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर विमानन, ऊर्जा और व्यापार क्षेत्रों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर टिकी हैं, जहां हर नया घटनाक्रम क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है।
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